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March 25, 2026

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ग्रामोदय विश्वविद्यालय में  कौशल विकास प्रशिक्षण के 7 नए पाठ्यक्रमों का शुभारंभविधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार रहे मुख्य अतिथि, डॉ. हर्ष बर्धन सिंह विशिष्ट अतिथि और कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे की अध्यक्षता

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चित्रकूट- 24 मार्च 2026। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में आज प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत 7 नए रोजगारपरक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर चित्रकूट के विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार मुख्य अतिथि, डॉ. हर्ष बर्धन सिंह तोमर , इग्नू दिल्ली विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने की। कार्यक्रम में कुलसचिव प्रो. आञ्जनेय पांडेय, प्रबंधन संकाय के अधिष्ठाता प्रो. अमरजीत सिंह तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रशिक्षक एवं प्रतिभागी विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार ने अपने संबोधन में कहा कि मानव विकास में शिक्षा के साथ-साथ कौशल (स्किल) का विशेष महत्व है। आने वाले समय में वही व्यक्ति अधिक मूल्यवान होगा जिसके पास हुनर होगा। उन्होंने भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने चित्रकूट जैसे पिछड़े एवं आदिवासी क्षेत्र में ग्रामोदय विश्वविद्यालय की स्थापना कर ग्रामीण विकास की अनूठी नींव रखी। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय गांव और ग्रामीण जनजीवन के समग्र विकास के उद्देश्य से स्थापित विश्व का एक विशिष्ट संस्थान है, जहां सैद्धांतिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान पर विशेष बल दिया जाता है।
श्री गहरवार ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कृषि, डेयरी, इंजीनियरिंग आदि क्षेत्रों के व्यावहारिक पक्षों पर प्रकाश डाला और कहा कि छात्र-छात्राएं अपनी शिक्षा एवं कौशल का उपयोग न केवल अपने कैरियर निर्माण में करें, बल्कि गांवों के विकास में भी योगदान दें। उन्होंने विभिन्न देशों के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और समाजसेवियों के अनुभवों का उल्लेख करते हुए नवाचार और कौशल की महत्ता पर बल दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने कहा कि सच्चा धर्म और सच्चा कर्म कभी नष्ट नहीं होता। उन्होंने विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलाधिपति भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए कहा कि इस संस्थान की आत्मा में उनके विचार और आदर्श समाहित हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामोदय विश्वविद्यालय प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के चुनिंदा उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों में अपना विशिष्ट स्थान रखता है।
प्रो. चौबे ने आगे कहा कि कला विषय सोच और कल्पना को विकसित करता है, विज्ञान विषय खोज की दिशा देता है तथा इंजीनियरिंग विषय ज्ञान के व्यावहारिक उपयोग को सशक्त बनाता है। कौशल शिक्षा इन सभी का समन्वित रूप है, जो विद्यार्थियों को प्रायोगिक ज्ञान प्रदान करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे रुचि और समर्पण के साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर इस अवसर का पूर्ण लाभ उठाएं तथा अन्य युवाओं को भी इससे जुड़ने के लिए प्रेरित करें।
कार्यक्रम का प्रारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन और अतिथियों सम्मान के साथ हुआ। अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के अधिष्ठाता और कुलसचिव प्रो आञ्जनेय पांडेय ने स्वागत उद्बोधन में ग्रामोदय विश्वविद्यालय की प्रगति एवं संचालित कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला। डॉ गोविन्द सिंह भदौरिया ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्य, औचित्य और उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी। अधिष्ठाता प्रबंधन संकाय प्रो अमर जीत सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। सफल संचालन इंजी धर्मेंद्र मिश्रा ने किया।
इसके पूर्व पाठ्यक्रम परिचय सत्र में सेवानिवृत्त सहायक निदेशक (व्यावसायिक शिक्षा) इंजी राजेश सिंहा ने रेगुलर पाठ्यक्रम के साथ साथ हुनर की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी। डॉ उमेश कुमार शुक्ला ने कृषि कौशल, इंजी अश्विनी दुग्गल ने फूड टेक्नोलॉजी, डॉ गोविन्द सिंह ने पंजीकरण प्रक्रिया, डॉ शिव शंकर सिंह ने नर्सरी, इंजी धर्मेंद्र मिश्रा और महेश कुमार सेन ने कक्षा सारणी के संबंध में जानकारी दी।

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