March 25, 2026

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भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को सुनाई गई रामकथा सुन श्रोतागण हुए राममयमलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास ने कराया रामकथा का रसपान

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चित्रकूट- परम पूज्य संत रणछोड़ दास जी महाराज के कर कमलों से जानकीकुंड में स्थापित श्री रघुवीर मंदिर ट्रस्ट बड़ी गुफा के तत्वाधान में विद्याधाम विद्यालय प्रांगण में चल रही नौ दिवसीय श्री रामकथा में वृंदावन से पधारे मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास जी महराज द्वारा राम कथा का रामभक्तो को रसपान कराया जा रहा है। कथा के पांचवे दिन सर्वप्रथम श्री सदगुरू सेवा संस्थान की ट्रस्टी एवं संस्थान के अध्यक्ष  विशद भाई मफतलाल की धर्म पत्नी रूपल बहन ने रामकथा की पोथी और महराज जी का पूजन अर्चन किया।तत्पश्चात महराज जी ने अपनी मधुर, अमृतमय वाणी से देश के कोने कोने से आए कथा श्रोताओं को भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को सुनाई गई रामकथा का प्रसंग का रसपान कराते हुए बताया कि  एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा कि श्रीराम कौन हैं और उनका वास्तविक स्वरूप क्या है। तब भगवान शिव ने माता पार्वती को  रामकथा और उनकी महिमा सुनाने लगे और बताया कि श्रीराम कोई साधारण मनुष्य नहीं, बल्कि स्वयं विष्णु के अवतार हैं, जो धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश के लिए पृथ्वी पर प्रकट हुए।
भगवान शिव ने राम के जन्म, उनके वनवास, सीता हरण और रावण वध की पूरी कथा बड़े प्रेम और भक्ति भाव से सुनाई। कथा सुनाते समय शिव स्वयं भी राम के गुणों में इतने तल्लीन हो गए कि उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। उन्होंने यह भी बताया कि राम का नाम ही इतना शक्तिशाली है कि उसका स्मरण करने मात्र से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
माता पार्वती ने इस कथा को अत्यंत श्रद्धा से सुना और वे भी श्रीराम की भक्ति में लीन हो गईं। महराज श्री ने बताया कि इस प्रकार यह प्रसंग न केवल राम की महिमा का वर्णन करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि स्वयं भगवान शिव भी राम के परम भक्त हैं। महराज श्री द्वारा इस प्रसंग को सुन सभी श्रोतागण भक्ति भाव से विभोर हो उठे।इस मौके पर चित्रकूट के सभी संत महंत, आम जनमानस, तमाम प्रांतों से पधारे गुरु भाई बहन एवं सदगुरू परिवार के सभी सदस्य उपस्थित रहे।

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