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September 15, 2026

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एकेएस विश्वविद्यालय में एमकॉम के चारों सेमेस्टर में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश पर मंथनविशेषज्ञों ने दिए सुझाव, शोध और अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर कुलपति ने दिया जोर

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सतना। एकेएस विश्वविद्यालय, सतना में भारतीय ज्ञान परंपरा को स्नातकोत्तर स्तर के एमकॉम पाठ्यक्रम में प्रभावी रूप से शामिल करने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का शनिवार को समापन हुआ। दूसरे दिन केंद्रीय बोर्ड ऑफ स्टडीज के अध्यक्ष डॉ. महेंद्र कुमार सिंघई की उपस्थिति में बोर्ड सदस्यों, विषय विशेषज्ञों और फैसिलिटेटर्स ने एमकॉम पाठ्यक्रम की विषय-वस्तु, शिक्षण पद्धति और व्यावहारिक उपयोगिता पर विस्तार से मंथन किया।


कार्यशाला के प्रथम सत्र में एमकॉम के तृतीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर के पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने भारतीय चिंतन, जीवन-मूल्यों और समकालीन शिक्षा के बीच समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया। साथ ही पाठ्यक्रम को विद्यार्थियों के लिए अधिक व्यावहारिक और उपयोगी बनाने के सुझाव दिए।
द्वितीय सत्र में एमकॉम के चारों सेमेस्टर के संपूर्ण पाठ्यक्रम का प्रस्तुतीकरण किया गया। पूर्व में हुई चर्चाओं और प्राप्त सुझावों को शामिल करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पक्षों को पाठ्यक्रम से जोड़ने के प्रावधानों पर विचार किया गया। विशेषज्ञों ने विषय-वस्तु, शिक्षण पद्धति तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के व्यावसायिक उपयोग से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव रखे।
पाठ्यक्रम विद्यार्थियों के ज्ञान को बनाएगा समृद्ध
कुलपति प्रो. बी.ए. चोपड़े ने भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों पर अधिकाधिक शोध की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शोध और अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। विभागाध्यक्ष एवं नोडल अधिकारी डॉ. धीरेंद्र ओझा ने कहा कि पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश विद्यार्थियों को भारतीय चिंतन, ज्ञान, संस्कृति और जीवन-मूल्यों से जोड़ने के साथ उनके व्यावहारिक एवं व्यावसायिक ज्ञान को भी समृद्ध करेगा।
समापन अवसर पर प्रो-वाइस चांसलर एवं डीन (वाणिज्य) डॉ. हर्षवर्धन ने आभार व्यक्त किया। कार्यशाला में प्रो चांसलर इंजीनियर अनंत कुमार सोनी, डॉ. असलम सईद, एसोसिएट डीन डॉ. विपुल शर्मा, सीएस दीक्षा पांडे, श्रीकृष्ण झा, विपिन कुमार सोनी एवं शिवम पांडे उपस्थित रहे। डॉ. धीरेंद्र ओझा ने विशेषज्ञों, बोर्ड सदस्यों, फैसिलिटेटर्स तथा कार्यशाला के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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