पांच दिन तक झुंड की तलाश……………….. आखिरकार नन्हे हाथी को मिली सुरक्षित पनाह
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झुंड से पुनर्मिलन के प्रयास रहे विफल, घायल और कमजोर शावक का विशेषज्ञ टीम ने किया सुरक्षित रेस्क्यू; अब रमकोला सेंटर में होगा इलाज और संरक्षण

धरमजयगढ़ – जंगल में अपने झुंड से बिछड़े करीब ढाई से तीन वर्ष के नन्हे हाथी की पांच दिनों तक चली जद्दोजहद आखिरकार सुरक्षित पड़ाव पर पहुंची। धरमजयगढ़ वन मंडल के बोरो परिक्षेत्र में अकेले भटक रहे शावक को उसके मूल झुंड से मिलाने के लिए वन विभाग ने लगातार प्रयास किए, लेकिन विभाग के अनुसार शावक झुंड के साथ नहीं रह सका। इसी बीच उसके बाएं पैर में चोट और शारीरिक कमजोरी सामने आने के बाद खुले जंगल में उसे छोड़ना जोखिमपूर्ण माना गया। अंततः मुख्य वन्यजीव संरक्षक की अनुमति के बाद 14 सितंबर को विशेषज्ञों की टीम ने उसका सुरक्षित रेस्क्यू किया और उसे सरगुजा के रमकोला स्थित हाथी रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया।
चाल्हा बाजार से शुरू हुई थी नन्हे हाथी की कहानी
9 सितंबर को ग्राम चालहा बाजार क्षेत्र में अकेले घूमते हाथी शावक की सूचना मिलने के बाद वन अमला और हाथी मित्र दल तत्काल मौके पर पहुंचा। शावक के स्वास्थ्य की जांच कर उसके खान-पान और देखरेख की व्यवस्था की गई। वन विभाग की टीम लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए रही।
10 सितंबर को शावक के मूल झुंड का पता चला। झुंड घटनास्थल से करीब 7-8 किलोमीटर दूर था। इसके बाद 11 और 12 सितंबर को शावक को उसके झुंड से मिलाने के लिए लगातार प्रयास किए गए। विभाग के अनुसार इन प्रयासों के बावजूद पुनर्मिलन सफल नहीं हो सका और शावक दोबारा भटककर वापस लौट आया।

जंगल में छोड़ना बन गया था जोखिम
लगातार पुनर्मिलन प्रयासों के बीच शावक की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ी। 13 सितंबर को कानन पेंडारी, बिलासपुर से वन्यप्राणी शल्यज्ञ और महावतों की विशेष टीम बुलाई गई। चिकित्सकीय जांच में उसके बाएं पैर में चोट और शारीरिक कमजोरी पाए जाने की जानकारी सामने आई।

वन विभाग के अनुसार लगातार पांच दिनों के असफल पुनर्मिलन प्रयास, शावक की शारीरिक स्थिति और आबादी क्षेत्र में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए उसे पुनः खुले जंगल में छोड़ना उसके लिए जोखिमपूर्ण हो सकता था। इसके बाद वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत मुख्य वन्यजीव संरक्षक की अनुमति लेकर उसके संरक्षण और जीवन रक्षा को प्राथमिकता देते हुए रेस्क्यू सेंटर भेजने का निर्णय लिया गया।
विशेषज्ञों ने संभाला मोर्चा, सुरक्षित हुआ रेस्क्यू
14 सितंबर को अचानकमार टाइगर रिजर्व, कानन पेंडारी और रमकोला से पहुंची विशेषज्ञ टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। पशु चिकित्सक डॉ. पी.के. चंदन और डॉ. अजीत पांडेय के साथ अनुभवी महावतों की टीम ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत शावक को सुरक्षित रूप से नियंत्रित कर रेस्क्यू किया।
प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे विशेष वाहन से रमकोला हाथी रेस्क्यू सेंटर के लिए रवाना किया गया। अब वहां विशेषज्ञों की निगरानी में उसके उपचार, पोषण और देखभाल की जाएगी।

पांच दिनों तक वन अमला रहा अलर्ट
शावक के आबादी क्षेत्र के आसपास विचरण के दौरान ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर भी वन विभाग लगातार सतर्क रहा। ग्रामीणों के साथ बैठकें कर सावधानी बरतने और हाथी से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की गई। हाथी मित्र दल और वन अमले की टीम लगातार क्षेत्र में निगरानी करती रही।
वन विभाग के अनुसार यह पूरा अभियान वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप तथा विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में संचालित हुआ। धरमजयगढ़ वन मंडल के अधिकारी-कर्मचारियों, हाथी मित्र दल और चालहा क्षेत्र के ग्रामीणों के सहयोग से शावक का रेस्क्यू पूरा किया गया।
धरमजयगढ़ वन मंडलाधिकारी सत्यदेव शर्मा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर शावक के रेस्क्यू एवं रमकोला भेजे जाने की जानकारी दी है।
अब रमकोला में नई जिंदगी की उम्मीद
जिस नन्हे हाथी ने पांच दिनों तक अपने झुंड तक पहुंचने के लिए जंगल और आबादी क्षेत्र के बीच भटकते हुए समय बिताया, अब उसकी अगली यात्रा रमकोला से शुरू होगी। वहां विशेषज्ञों की निगरानी में उसे उपचार, पर्याप्त पोषण और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। वन विभाग की प्राथमिकता फिलहाल उसकी जीवन रक्षा, स्वास्थ्य सुधार और सुरक्षित पुनर्वास है।
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