रामपुर बटुरा परियोजना में स्थानीय मजदूरों के शोषण के आरोप, रोजगार और वेतन भुगतान व्यवस्था पर उठे सवाल ।।
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बाहरी लोगों को रोजगार देने और स्थानीय श्रमिकों को कम वेतन पर काम कराने के आरोप, महीनों तक वेतन भुगतान लंबित रहने की शिकायतों से बढ़ा आक्रोश
यशपाल जाट अनूपपुर/शहडोल। एसईसीएल की रामपुर बटुरा परियोजना में कार्यरत आउटसोर्स कंपनी जय अम्बे एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। स्थानीय लोगों और श्रमिकों द्वारा कंपनी पर रोजगार में भेदभाव, कम वेतन देने तथा समय पर मजदूरी भुगतान नहीं करने जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों के बाद परियोजना क्षेत्र में असंतोष का माहौल बनता दिखाई दे रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि परियोजना प्रभावित क्षेत्र के युवाओं और मजदूरों को रोजगार देने के बजाय बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। उनका आरोप है कि क्षेत्र के योग्य और बेरोजगार युवाओं को नजरअंदाज कर अन्य जिलों और राज्यों के लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।
वहीं, जिन स्थानीय मजदूरों को रोजगार दिया भी गया है, उन्हें अपेक्षाकृत कम वेतन पर काम करने के लिए मजबूर किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। मजदूरों का आरोप है कि समान कार्य के बावजूद उन्हें उचित पारिश्रमिक नहीं मिल रहा, जिससे उनके आर्थिक हालात प्रभावित हो रहे हैं।
मजदूरी भुगतान को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। श्रमिकों का कहना है कि कई-कई महीनों तक वेतन भुगतान लंबित रहने की स्थिति बन जाती है, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। समय पर वेतन नहीं मिलने के कारण श्रमिकों में कंपनी के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब किसी क्षेत्र में खनन या औद्योगिक परियोजना स्थापित होती है, तब स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन रामपुर बटुरा परियोजना में इन दावों की वास्तविकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका मानना है कि यदि स्थानीय युवाओं और श्रमिकों को उनका अधिकार नहीं मिला तो आने वाले समय में विरोध और तेज हो सकता है।
ग्रामीणों, श्रमिक संगठनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन, श्रम विभाग, एसईसीएल प्रबंधन तथा संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता, समान कार्य के लिए समान वेतन तथा सभी श्रमिकों को समय पर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है।
हालांकि, इस संबंध में कंपनी प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। मामले की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी, लेकिन क्षेत्र में उठ रहे सवालों ने परियोजना की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।
स्थानीयों की प्रमुख मांगें :::


परियोजना में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार मिले।
मजदूरों का लंबित वेतन तत्काल भुगतान किया जाए।
समान कार्य के लिए समान वेतन सुनिश्चित किया जाए।
श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन कराया जाए।
प्रशासन एवं श्रम विभाग द्वारा स्वतंत्र जांच कराई जाए।
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