भारतीय कृषि विमर्श का अभिनव आयाम: समकालीन प्रगति, नवाचार और सतत प्रवृत्तियों का प्रामाणिक संकलन
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सतना। एग्री रूट पब्लिकेशन हाउस द्वारा प्रकाशित ग्रंथ “इंडियन एग्रीकल्चर 2025: रिसेंट एडवांसेज, इनोवेशंस एंड सस्टेनेबल ट्रेंड्स” भारतीय कृषि के बहुआयामी विकास, वैज्ञानिक उत्कर्ष तथा सतत् कृषि पद्धतियों के समन्वित अध्ययन का एक विशिष्ट एवं प्रामाणिक दस्तावेज़ रूप में प्रतिष्ठित हुआ है। ISBN 9788199288515 से अभिसूचित यह ग्रंथ पाँच प्रख्यात विद्वानों—डॉ. के. दिनेश बाबू, डॉ. निहाल आर., डॉ. वृंदावन सिंह, डॉ. परशुराम शेली तथा अंजुम एफ. शेख—के संयुक्त बौद्धिक प्रयास का सुफल है।

ग्रंथ की प्रस्तावना में इसे भारतीय कृषि के वर्तमान एवं भावी परिदृश्य को रूपायित करने वाले उदित होते वैज्ञानिक विकासों, अभिनव तकनीकी हस्तक्षेपों तथा सतत् कृषि प्रतिमानों का समग्र एवं विश्लेषणात्मक प्रतिपादन बताया गया है। इसमें देश के विविध प्रख्यात वैज्ञानिकों एवं शिक्षाविदों के शोधपरक योगदानों को समाहित करते हुए कृषि विज्ञान के बहुविषयक आयामों—जैसे पादप प्रजनन, जैव प्रौद्योगिकी, कृषि विज्ञान, उद्यानिकी, मृदा विज्ञान, कीट विज्ञान तथा कृषि विस्तार—का सुविस्तृत एवं समन्वित विवेचन प्रस्तुत किया गया है।
यह कृति न केवल कृषि अनुसंधान एवं शिक्षण पद्धतियों में हो रहे संरचनात्मक एवं तकनीकी रूपांतरणों का गहन अन्वेषण करती है, अपितु वैज्ञानिक प्रगति एवं नवाचारों के माध्यम से भारतीय कृषि को आत्मनिर्भर, उत्पादक तथा पर्यावरणीय दृष्टि से संतुलित बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी दृष्टिकोण भी अभिव्यक्त करती है। ग्रंथ का बहुविषयक स्वरूप इसे शोधार्थियों, शिक्षाविदों तथा नीति-निर्माताओं के लिए एक अनिवार्य संदर्भ ग्रंथ के रूप में स्थापित करता है।
उल्लेखनीय है कि ए.के.एस. विश्वविद्यालय के जेनेटिक्स एवं पादप प्रजनन विभागाध्यक्ष डॉ. वृंदावन सिंह की विद्वतापूर्ण सहभागिता इस ग्रंथ की अकादमिक गरिमा को और अधिक ऊँचाई प्रदान करती है। विश्वविद्यालय परिवार द्वारा समस्त लेखकों को इस महत्त्वपूर्ण बौद्धिक उपलब्धि हेतु हार्दिक अभिनंदन प्रेषित किया गया है।
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