August 16, 2026

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लीला टोला की खुशी क्लीनिक पर सवाल, राजनीतिक पहुंच के दावों के बीच कार्रवाई कब?

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राजेंद्र ग्राम/अनूपपुर। पुष्पराजगढ़ क्षेत्र के राजेंद्र ग्राम अंतर्गत लीला टोला में खुशी क्लीनिक के नाम से संचालित कथित क्लीनिक को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि यहां लंबे समय से मरीजों का उपचार किया जा रहा है और गंभीर मामलों में ऑपरेशन तक किए जाने की बात सामने आती रही है। वहीं संबंधित संचालक की चिकित्सकीय डिग्री, पंजीयन एवं क्लीनिक संचालन की वैधानिक अनुमति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

लीला टोला की खुशी क्लीनिक—किसके संरक्षण में चल रहा इलाज?

आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कार्रवाई के प्रयास किए जाने के बावजूद क्लीनिक का संचालन कथित रूप से जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी कार्रवाई की भनक लगती है, क्लीनिक बंद कर दिया जाता है और बाद में दोबारा गतिविधियां शुरू हो जाती हैं। यदि यह आरोप सही है तो सवाल उठता है कि विभागीय कार्रवाई की जानकारी पहले ही संबंधित लोगों तक कैसे पहुंच जाती है?

मामले को लेकर राजनीतिक पहुंच की चर्चा भी सामने आ रही है। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति स्वयं को सांसद का करीबी बताकर अपना प्रभाव दिखाता है। हालांकि इस राजनीतिक संरक्षण के दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति वास्तव में राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर कार्रवाई से बचने का प्रयास कर रहा है तो इसकी भी जांच आवश्यक है।

डिग्री और अनुमति की जांच सबसे जरूरी

ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण लोग निजी क्लीनिकों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति के पास मान्य चिकित्सकीय योग्यता या आवश्यक अनुमति नहीं है और वह मरीजों का उपचार अथवा ऑपरेशन करता है, तो यह सीधे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।

इसलिए स्वास्थ्य विभाग को खुशी क्लीनिक, लीला टोला की मौके पर जांच कर संचालक की शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल पंजीयन, क्लीनिक का पंजीयन, उपचार की अनुमति, ऑपरेशन की सुविधा एवं मरीजों से संबंधित रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए।

बिजुरी में मंत्री का साथ, लीला टोला में सांसद का साथ?

एक ओर बिजुरी क्षेत्र में कथित झोलाछाप डॉक्टर को राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोप लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लीला टोला की खुशी क्लीनिक को लेकर संचालक द्वारा सांसद की नजदीकी का दावा किए जाने की चर्चा है। ऐसे आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग की निष्पक्ष कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सवाल यह है कि आम ग्रामीण की जिंदगी से जुड़े इस मामले में राजनीतिक पहुंच बड़ी है या कानून?

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि क्लीनिक वैध दस्तावेजों और योग्य चिकित्सक के माध्यम से संचालित हो रहा है तो स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो बिना किसी राजनीतिक दबाव के नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

लीला टोला की खुशी क्लीनिक पर उठे सवालों का जवाब अब जांच से ही मिलेगा—क्या यह वैध चिकित्सा केंद्र है या राजनीतिक पहुंच के साये में संचालित कथित झोलाछाप क्लीनिक?

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