August 13, 2026

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ए.के.एस. विश्वविद्यालय में ‘द पावर ऑफ हैप्पीनेस’ पर प्रेरक कार्यक्रमसकारात्मक सोच और आत्मचिंतन से जीवन में आती है वास्तविक खुशी

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सतना। ए.के.एस. विश्वविद्यालय, सतना में ब्रह्माकुमारी परिवार के सहयोग से ‘द पावर ऑफ हैप्पीनेस’ विषय पर प्रेरक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को तनावमुक्त जीवन, सकारात्मक सोच, आत्मचिंतन और आंतरिक खुशी के महत्व से परिचित कराना रहा। कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी परिवार के सदस्यों के साथ विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं एवं शिक्षक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ताओं ने कहा कि खुशी किसी बाहरी उपलब्धि या भौतिक साधन पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के विचारों, दृष्टिकोण और आंतरिक शांति से जुड़ी होती है।

विनय अखिलचंद्र पांड्या ने कहा कि परिस्थितियां हमेशा व्यक्ति के नियंत्रण में नहीं होतीं, लेकिन उन परिस्थितियों के प्रति अपनी सोच और प्रतिक्रिया को सकारात्मक बनाया जा सकता है। आत्मचिंतन और राजयोग के माध्यम से मन को शांत एवं विचारों को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है।
बी.के. श्रीकांत ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते तनाव और प्रतिस्पर्धा के बीच मानसिक संतुलन बेहद जरूरी है। व्यक्ति यदि कुछ समय स्वयं के साथ बिताए और अपने विचारों को समझे तो जीवन में शांति एवं प्रसन्नता का अनुभव बढ़ सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. रमाजयम गोविंदराज ने कहा कि मानसिक शांति का प्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य, कार्यक्षमता और व्यवहार पर भी पड़ता है। सकारात्मक सोच, ध्यान और संतुलित जीवनशैली व्यक्ति को तनाव से उबरने तथा बेहतर जीवन जीने में सहायता करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सफलता के साथ मानसिक शांति और प्रसन्नता को भी जीवन का महत्वपूर्ण लक्ष्य बनाएं।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के निदेशक अमित कुमार सोनी, प्रति-कुलपति डॉ. हर्षवर्धन, सूर्यनाथ सिंह गहरवार और शशि दीदी की प्रमुख सहभागिता रही। डॉ. दीपक मिश्रा ने कार्यक्रम का संचालन किया। ब्रह्माकुमारी परिवार के सदस्यों तथा विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने वक्ताओं के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना।
कार्यक्रम का सार यह रहा कि सच्ची खुशी बाहरी परिस्थितियों में नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर मौजूद सकारात्मक सोच, आत्मिक शांति और संतुलित दृष्टिकोण में निहित है। आत्मचिंतन, राजयोग और सकारात्मक विचारों को जीवन का हिस्सा बनाकर व्यक्ति स्वयं प्रसन्न रह सकता है और अपने व्यवहार से समाज में भी खुशियां एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकता है।

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