विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प आवश्यक : डॉ. आर.सी. त्रिपाठी
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सतना। प्रतिवर्ष 5 जून को मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने का संदेश देता है। इस वर्ष ए के एस विश्वविद्यालय, सतना में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विविध जागरूकता कार्यक्रम, संगोष्ठी एवं वृक्षारोपण अभियान आयोजित किए जाएंगे। यह जानकारी विश्वविद्यालय के कृषि संकाय के वरिष्ठ फैकल्टी डॉ. आर.सी. त्रिपाठी ने दी।

डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण विश्व की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। बढ़ते औद्योगीकरण, शहरीकरण, वनों की कटाई तथा प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण जलवायु परिवर्तन की समस्या गंभीर होती जा रही है। वैश्विक तापमान में वृद्धि, अनियमित वर्षा, हीट वेव, सूखा तथा बाढ़ जैसी घटनाएं पर्यावरणीय असंतुलन के स्पष्ट संकेत हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में एल-नीनो प्रभाव की संभावनाओं के कारण मौसम की अनिश्चितता बढ़ सकती है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव कृषि, जल संसाधनों एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे समय में जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती, कृषि वानिकी तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. त्रिपाठी ने हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते पर्यटक एवं तीर्थयात्री दबाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे पवित्र स्थलों की पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए नियंत्रित एवं पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आस्था और प्रकृति संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना समय की मांग है।
उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में विकसित हो रहे बहु-लेन राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे के साथ व्यापक वृक्षारोपण को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। विकास परियोजनाओं के साथ हरित पट्टियों का निर्माण तथा स्थानीय प्रजातियों के पौधों का रोपण पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि पृथ्वी के फेफड़े कहे जाने वाले वन निरंतर घट रहे हैं, जिससे जैव विविधता एवं पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। इसलिए विकास की प्रत्येक योजना में पर्यावरणीय वहन क्षमता को ध्यान में रखा जाना चाहिए। सतत विकास ही मानवता के सुरक्षित भविष्य का आधार है।
उन्होंने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं नागरिकों से विश्व पर्यावरण दिवस पर कम से कम एक पौधा लगाने, जल संरक्षण करने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने तथा पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि 5 जून को ए के एस विश्वविद्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में वृक्षारोपण, पर्यावरण जागरूकता संगोष्ठी, विशेषज्ञ व्याख्यान, हरित परिसर अभियान तथा छात्र-छात्राओं के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना तथा उन्हें प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित करना है।
उन्होंने कहा कि पृथ्वी हमारा एकमात्र घर है और इसकी सुरक्षा प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। यदि हम आज प्रकृति के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाएंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित, स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।
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