July 16, 2026

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सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता की मिसाल बने शीलेंद्र, हिन्दू एकता सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त

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सतना। किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति उसके ऐसे युवाओं में निहित होती है, जो अपने सपनों के साथ-साथ दूसरों के जीवन में भी उम्मीद की रोशनी जलाने का संकल्प रखते हैं। सतना जिले के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है कि युवा समाजसेवी शीलेंद्र को हिन्दू एकता सेवा संघ का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे संगठन में राज्य स्तरीय जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे थे। उनकी निष्ठा, सेवा भावना और निरंतर सामाजिक कार्यों से प्रभावित होकर संगठन ने उन्हें यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा है।


कम उम्र में ही शीलेंद्र ने जिस संवेदनशीलता और मानवीय सोच के साथ समाज सेवा का मार्ग चुना, वह आज अनेक युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है। उन्होंने अपने जन्मदिन को उत्सव की जगह सेवा का माध्यम बनाया और तीन जरूरतमंद बच्चियों की शिक्षा का संपूर्ण दायित्व अपने ऊपर लिया। एक गरीब ब्राह्मण परिवार की बेटी के विवाह में 21 हजार रुपये की सहायता देकर उन्होंने सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया।
मानवता के प्रति उनके समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प लिया है, ताकि उनकी आंखें किसी और के जीवन में रोशनी बन सकें। पिछले पांच वर्षों से वे प्रत्येक सर्दी में 111 जरूरतमंद लोगों को कंबल वितरित कर रहे हैं। उंचेहरा थाना में बंद कैदियों को 51 गर्म कंबल भेंट कर उन्होंने यह संदेश दिया कि संवेदनाएं हर व्यक्ति के लिए समान होनी चाहिए।
गौशालाओं में गायों की सेवा, जरूरतमंद परिवारों को हर सप्ताह भोजन सामग्री उपलब्ध कराना और जहां भी आवश्यकता महसूस हो वहां अपनी क्षमता अनुसार सहयोग देना, उनकी जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है। वे अपनी आय से नियमित रूप से जरूरतमंद लोगों के लिए खाद्य सामग्री उपलब्ध कराते हैं।
सामाजिक कार्यों के साथ-साथ शैक्षणिक क्षेत्र में भी शीलेंद्र ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उनकी चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्हें 19 सम्मान प्राप्त हुए हैं, साथ ही एक विशेष इंटेंशन अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है। इसके अतिरिक्त उनके चार रिसर्च पेपर, पांच बुक चैप्टर प्रकाशित हुए हैं तथा एक पेटेंट भी उनके नाम दर्ज है।
शीलेंद्र की यह यात्रा केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है जिसमें समाज सेवा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है।

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