प्रधानमंत्री आवास मामले में जाँच में लीपा पोती का आरोप ! आवेदक ने निष्पक्ष पुनः जाँच की उठाई मांग
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धरमजयगढ़ क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास से जुड़े एक मामले में जाँच प्रक्रिया को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। आवेदक ने आरोप लगाया है कि पूरे मामले में मनगढ़ंत और तथ्यहीन बातों को आधार बनाकर वास्तविक गलतियों को छिपाने का प्रयास किया गया है।
आवेदक के अनुसार जाँच प्रक्रिया पूरी तरह अपारदर्शी रही। उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के ही जाँच पूरी कर दी गई और जिन जनप्रतिनिधि के कार्यकाल में यह कार्य हुआ, उन्हें ही जाँच का हिस्सा या साक्षी बना दिया गया, जिससे निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। साथ ही सीमित लोगों की उपस्थिति में औपचारिकता निभाते हुए जाँच पूरी कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
मामले को लेकर आवेदक ने कई अहम बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने आवास के लिए दी गई जमीन का पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जमीन आवास निर्माण से पहले दी गई थी या बाद में, वास्तव में जमीन दी भी गई थी या नहीं, और क्या दानदाता द्वारा इस संबंध में विधिवत शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया था।
इसके साथ ही जमीन के कागजात को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। आवेदक ने पूछा है कि जमीन के मूल दस्तावेज दानदाता के पास थे या वर्तमान में हैं, तथा क्या उक्त कागजात विधिवत रूप से हितग्राही को हस्तांतरित किए गए हैं या नहीं। यदि दस्तावेजों का सही तरीके से हस्तांतरण नहीं हुआ है, तो पूरी प्रक्रिया की वैधता संदिग्ध हो जाती है।
आवेदक का कहना है कि जाँच अपूर्ण, भ्रामक और संदिग्ध है तथा उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया गया। इन सभी आपत्तियों के साथ उन्होंने अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील प्रस्तुत कर पुनः निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यात्मक जाँच कराने की मांग की है। साथ ही यह भी अनुरोध किया है कि जाँच की पूर्व सूचना उन्हें दी जाए, ताकि वे स्वयं उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकें।
आवेदक का मानना है कि यदि सभी पहलुओं की गहन जाँच की जाती है, तो पूरे मामले में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। अब इस संवेदनशील मामले में प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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