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माननीय कलेक्टर साहब! लुडेग में पटवारी का राज चल रहा है या संविधान का?

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🧨 कलेक्टर साहब! लुडेग में पटवारी का राज चल रहा है या संविधान का?

📍 जशपुर, 19 जून 2025 | विशेष रिपोर्ट – “उद्‍घोष समय”

“आदिवासियों की ज़मीन बिक रही है… और सरकारी सिस्टम पटवारी की मुहर पर मौन है।”


⚖️ पटवारी कृष्ण कुमार यादव पर गंभीर आरोप – बिना आदेश आदिवासी जमीनों की चौहद्दी, अवैध रजिस्ट्री में सहायक

पटवारी द्वारा दी गई चौहद्दी रिपोर्ट के आधार पर दो बार आदिवासी जमीनें बेची गईं
बिना 170 ख, बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति, सिर्फ चौहद्दी और पंचायत प्रस्ताव के आधार पर रजिस्ट्री।


🔥 पहला मामला – खसरा 299/3

  • 📅 रजिस्ट्री: 22 जून 2023
  • 🔸 भूमि स्वामी: अनुसूचित जनजाति के लोग
  • 🔸 क्रेता: अंकित कुमार अग्रवाल
  • 🧾 नामांतरण में कारण लिखा गया – “रजिस्ट्री बिना आदेश के”, फिर भी नामांतरण पूरा कर दिया गया।

🔥 दूसरा मामला – खसरा 299/4

  • 📅 रजिस्ट्री: 03 जून 2025
  • 🔸 भूमि स्वामी: हेमंती बाई (अनुसूचित जनजाति)
  • 🔸 क्रेता: मोहन लाल अग्रवाल
  • ⚠️ स्थिति: मामला अभी विवादित है, फिर भी पटवारी ने चौहद्दी दी, जिससे रजिस्ट्री संभव हो गई।

💣 खास बातें जो ज़िला प्रशासन को हिला देंगी:

  1. दोनों ही खसरों पर पटवारी की चौहद्दी दी गई – यह दस्तावेज़ प्रमाणित करता है।
  2. राजस्व न्यायालय में कोई पूर्व आदेश नहीं, फिर भी रजिस्ट्री हो गई।
  3. पंचायत प्रस्ताव का उपयोग किया गया, जो कानूनन वैध नहीं है।
  4. दोनों केस में विक्रेता आदिवासी, खरीददार बाहरी व्यापारी वर्ग।
  5. पटवारी पहले भी शिकायत के बाद अटैच हो चुके हैं, फिर भी वापस पोस्टिंग ले आए।

📣 हमारी माँग:

  1. पटवारी कृष्ण कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।
  2. 299/3 और 299/4 दोनों रजिस्ट्री को शून्य घोषित किया जाए।
  3. संपूर्ण पंचायत प्रस्ताव प्रक्रिया की जाँच हो – और सरपंच, सचिव पर भी कार्यवाही हो।
  4. जिले की सभी आदिवासी भूमि रजिस्ट्री की समीक्षा हो।

📜 न्यायिक दृष्टि से क्या गलत हुआ?

🔹 छत्तीसगढ़ भू-अधिनियम की धारा 165 (6) – अनुसूचित जनजातियों की भूमि बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के स्थानांतरित नहीं की जा सकती।
🔹 चौहद्दी देना अनुमति नहीं है – यह केवल सीमांकन है।
🔹 पंचायत प्रस्ताव भूमि स्वामित्व प्रमाण नहीं होता।


📌 निष्कर्ष:

अगर ये खबर सिर्फ खबर रही, और इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई – तो समझिए अब “नामांतरण नहीं, नामांतरण में षड्यंत्र” का दौर शुरू हो चुका है।

🎬 पार्ट 2 जल्द आ सकता है…

“यह तो शुरुआत है —
अगली रिपोर्ट में दस्तखत करने वालों की भूमिका सामने आएगी!”

“कहानी अभी ज़िंदा है… ज़मीन अब भी बेजुबान है!”


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