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September 27, 2026

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छाल खदान विस्तार: विरोध के बाद प्रशासन व SECL प्रबंधन के साथ बनी सहमति, 29 सितंबर की जनसुनवाई की तैयारियां शुरू

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धरमजयगढ़ / छाल – साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की छाल खदान विस्तार को लेकर उपजा विरोध और गतिरोध आखिरकार प्रशासन, पुलिस और SECL प्रबंधन की तीन दिवसीय लंबी बातचीत के बाद समाप्त हो गया है। ग्रामीणों को उनकी प्रमुख मांगों पर लिखित एवं मौखिक आश्वासन मिलने के बाद आगामी 29 सितंबर 2026 को होने वाली जनसुनवाई के सुचारू आयोजन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
​ग्रामीणों का कड़ा रुख: बारिश के बीच टेंट रुकवाकर मैदान में डटे रहे लोग


​प्रस्तावित जनसुनवाई से पूर्व ग्रामीणों ने अपनी लंबित समस्याओं एवं मांगों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाया था। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना था कि जब तक पुरानी मांगों का ठोस और लिखित समाधान नहीं होता, तब तक वे जनसुनवाई की तैयारियों को स्वीकार नहीं करेंगे। इसी क्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे बारिश के बीच जनसुनवाई स्थल पर पहुंच गए थे और वहां टेंट लगाने का काम रुकवा दिया था तथा पूरे दिन मैदान में डटे रहे थे, जिसके बाद सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत शुरू की।


​प्रमुख मांगें और गंभीर चिंताएं: पुनर्वास, रोजगार और पर्यावरण पर सवाल
​ग्रामीणों का मुख्य सवाल केवल प्रस्तावित खदान विस्तार तक ही सीमित नहीं था, बल्कि छाल क्षेत्र में खदान और रेलवे परियोजनाओं के कारण पहले से ही बड़ी मात्रा में भूमि अधिग्रहित हो चुकी है। खेदापाली के ग्रामीणों ने दावा किया था कि उनके गांव की लगभग 80 प्रतिशत भूमि पूर्व में अधिग्रहण की प्रक्रिया में जा चुकी है तथा बची हुई भूमि खदान, रेलवे लाइन और जलाशय के बीच सीमित हो गई है, इसी आधार पर उन्होंने शेष भूमि के अधिग्रहण के साथ समुचित पुनर्वास की मांग रखी। इसके अलावा ग्रामीणों ने खदान में होने वाले विस्फोटों से मकानों में दरारें और नुकसान होने का दावा भी किया और कोयला परिवहन से उड़ने वाली धूल, भूजल स्तर में कथित गिरावट, कृषि भूमि की उत्पादकता, सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए तथा खनन और परिवहन गतिविधियां बढ़ने की स्थिति में स्थानीय लोगों, किसानों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था की मांग की। बांधापाली के ग्रामीणों ने पुनर्वास और रोजगार को अपना प्रमुख मुद्दा बनाया और अधूरे मकान सर्वे को दोबारा कराने, वर्तमान में वयस्क हुए प्रभावित परिवारों को पुनर्वास का लाभ देने तथा जिन परिवारों को अब तक पुनर्वास नहीं मिला है, उन्हें निर्धारित व्यवस्था के अनुसार जमीन या मुआवजा देने की मांग रखी, साथ ही भूमिहीन प्रभावित परिवारों को रोजगार, कम भूमि वाले प्रभावित भू-स्वामियों को नौकरी और संयुक्त खातों से प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार की मांग भी सामने आई। ग्रामीणों ने बांधापाली में लगभग 60 से 70 एकड़ ऐसी जमीन के अधिग्रहण का मुद्दा भी उठाया जिसे उनके अनुसार अब तक SECL ने अधिग्रहित नहीं किया है और प्रस्तावित पुनर्वास स्थल को लेकर भी अपनी आपत्तियां रखीं। यह मामला केवल जमीन और रोजगार तक सीमित नहीं रहा बल्कि ग्रामीणों ने पेयजल, बिजली, सड़क, स्कूल bus, स्वास्थ्य सुविधा और एम्बुलेंस जैसी मूल जरूरतों को भी मांगों में शामिल किया, प्रभावित बच्चों की शिक्षा और SECL द्वारा संचालित विद्यालय में प्रवेश से जुड़ी परेशानियों का मुद्दा उठाया तथा क्षेत्र में कुछ स्ट्रीट लाइटों के काम नहीं करने और स्थानीय स्तर पर CSR के माध्यम से अपेक्षित विकास कार्य नहीं होने का दावा भी किया।
​प्रशासन और SECL प्रबंधन की सक्रियता: तीन दिन की मैराथन बैठकों का दौर
​विरोध के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्रामीणों और SECL प्रबंधन के बीच बातचीत का सिलसिला तेज किया और एसडीएम, तहसीलदार तथा पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में लगातार बैठकों का दौर चला। शनिवार को हुई निर्णायक बैठक में धरमजयगढ़ एसडीएम, छाल तहसीलदार लोमेश मीरी, एसडीओपी खरसिया, छाल थाना प्रभारी अनवर अली खान, SECL महाप्रबंधक मनोज कुमार तथा छाल उपक्षेत्रीय प्रबंधक के.सी. सुरेन्द्रनाथ सहित संबंधित अधिकारी और मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
​लिखित आश्वासन के बाद बनी सहमति: जनसुनवाई के लिये खुला रास्ता , संवाद से निकला समाधान
​इस बैठक में अधिकारियों ने ग्रामीणों की मांगों को बिंदुवार सुना और नियमानुसार उनके निराकरण को लेकर चर्चा की तथा प्रबंधन की ओर से लिखित और मौखिक आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई जिसके अनुसार ग्रामीणों की नौकरी की मांग को स्वीकार किए जाने तथा अन्य मांगों के निराकरण की दिशा में सहमति जताई गई, जिसके बाद ग्रामीणों ने जनसुनवाई के लिये सहमति व्यक्त की। सहमति बनने के बाद प्रशासन और SECL प्रबंधन की ओर से जनसुनवाई स्थल पर तैयारियों की शुरुआत कर दी गई और जिस मैदान में कुछ समय पहले ग्रामीण बारिश के बीच डटे रहकर टेंट लगाने का काम रुकवा रहे थे, उसी स्थान पर अब जनसुनवाई की तैयारियां आगे बढ़ने लगीं।
​पारंपरिक रीति-रिवाज: देवी-देवताओं के आवाहन के साथ हुआ भूमिपूजन
​सहमति बनने के बाद जनसुनवाई स्थल पर स्थानीय परंपरा के अनुसार देवी-देवताओं का आवाहन करते हुए पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चार किया गया। इसके उपरांत SECL महाप्रबंधक मनोज कुमार, छाल उपक्षेत्रीय प्रबंधक के.सी. सुरेन्द्रनाथ और वरिष्ठ ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से श्रीफल फोड़कर जनसुनवाई स्थल का भूमिपूजन किया और क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और 29 सितंबर को होने वाली जनसुनवाई के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए प्रार्थना की। भूमिपूजन कार्यक्रम में जनसुनवाई के नोडल अधिकारी के.के. भोई, एरिया कार्मिक विभाग से ए.डी. टंडन, छाल कार्मिक विभाग से रामा कृष्णा, राजस्व विभाग से सेठी, सिविल विभाग से मिश्रा, सुरक्षा विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और मजदूर संगठनों की ओर से यूनियन प्रतिनिधि डी.एल. ग्वालवंशी , आशीष पटेल, सुरेश सिंह, , रिपु पांडे, ननकी साहू , बेनू गबेल, घनश्याम सिदार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
​जनसुनवाई में क्या होगा ग्रामीणों का रुख ?
​छाल खदान विस्तार को लेकर बारिश में टेंट लगवाने से शुरू हुआ विरोध अब तीन दिन की बातचीत, लिखित आश्वासन और ग्रामीणों की सहमति तक पहुंच चुका है और अब 29 सितंबर 2026 को प्रस्तावित जनसुनवाई में परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, रोजगार और स्थानीय समस्याओं से जुड़े मुद्दे सामने आने की पूरी संभावना है। बहरहाल जनसुनवाई में ग्रामीणों का क्या रुख रहता है यह 29 सितम्बर को ही स्पष्ट हो सकेगा !

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