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September 22, 2026

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केवल यह मत सोचिए कि आप क्या बना सकते हैं; यह सोचिए कि आप कौन-सी वास्तविक समस्या हल कर सकते हैं।डीआईसीई योजना के तहत विद्यालयी विद्यार्थियों में ए.के.एस. विश्वविद्यालय द्वारा उद्यमिता कौशल विकास की पहल

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सतना, 21 सितंबर 2026।ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एडुकेशन, शिक्षा मंत्रालय , भारत सरकार के तत्वाधान में विद्यालयी विद्यार्थियों में नवाचार, रचनात्मकता, समस्या-समाधान एवं उद्यमिता कौशल विकसित करने के उद्देश्य से डेवलपिंग इनोवेशन कल्चर एंड एंटरप्रेन्योरशिप (डीआईसीई) योजना के अंतर्गत ए.के.एस. विश्वविद्यालय, सतना द्वारा सोमवार को सतना के तीन प्रमुख पीएम श्री विद्यालयों में उद्यमिता कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के अंतर्गत पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1 सतना, पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-2 सतना तथा शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सतना में विद्यार्थियों के लिए विशेष व्याख्यान आयोजित किए गए।कार्यक्रम में ए.के.एस. विश्वविद्यालय के प्रो. कमलेश चौरे, डायरेक्टर, सेंटर फॉर रिसर्च इनोवेशन, इनक्यूबेशन, स्किल डेवलपमेंट ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में विद्यार्थियों के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनमें रचनात्मक सोच, समस्या की पहचान, समाधान विकसित करने, प्रयोग करने और अपने विचारों को व्यवहारिक रूप देने की क्षमता विकसित करना भी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि उद्यमिता केवल व्यवसाय शुरू करने का नाम नहीं है, बल्कि समाज और दैनिक जीवन की वास्तविक समस्याओं को पहचानकर उनके लिए उपयोगी, वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक समाधान विकसित करने की सोच है। विद्यार्थियों को छोटी-छोटी समस्याओं को अवसर के रूप में देखने तथा अपनी जिज्ञासा और रचनात्मकता को नवाचार में बदलने के लिए प्रेरित किया गया।“क्या बना सकते हैं?” से पहले सोचें—“कौन-सी समस्या हल कर सकते हैं?”व्याख्यान के दौरान प्रो. चौरे ने विद्यार्थियों को उद्यमिता की सोच विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल यह नहीं सोचना चाहिए कि “मैं क्या बना सकता हूं?”, बल्कि यह भी सोचना चाहिए कि “मैं कौन-सी वास्तविक समस्या हल कर सकता हूं?”उन्होंने विद्यार्थियों को समस्या पहचान, विचार निर्माण, रचनात्मक सोच, नवाचार, समाधान विकास और प्रारूप निर्माण की प्रक्रिया समझाई। विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी भी बड़े नवाचार की शुरुआत किसी छोटी समस्या, प्रश्न या विचार से हो सकती है।

उन्होंने विद्यार्थियों को अपने विचारों को केवल कल्पना तक सीमित न रखते हुए छोटे स्तर पर मॉडल एवं प्रारूप तैयार करने, उनका परीक्षण करने तथा परिणामों के आधार पर उनमें सुधार करने के लिए प्रेरित किया।तीनों विद्यालयों में निर्धारित समय पर हुए कार्यक्रमडीआईसीई योजना के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1, सतना में प्रातः 10:30 बजे उद्यमिता कौशल विकास सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम के समन्वय में विद्यालय के एसआईसी समन्वयक श्री पदम सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विद्यालय के प्राचार्य श्री सूर्यकांत पाठक ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान किया।

इसके बाद पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-2, सतना में प्रातः 11:30 बजे विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम के समन्वय में एसआईसी समन्वयक सुश्री श्वेता वंश आर्यन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विद्यालय के प्राचार्य श्री राजकुमार विश्वकर्मा ने कार्यक्रम के लिए सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान किया।अपराह्न 3:30 बजे शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सतना में छात्राओं के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम के समन्वय में एसआईसी समन्वयक सुश्री रचना जोशी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विद्यालय प्रशासन एवं शिक्षकों के सहयोग से छात्राओं ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।विद्यार्थियों में विकसित किया गया उद्यमशील दृष्टिकोणकार्यक्रम में विद्यार्थियों को बताया गया कि उद्यमिता के लिए केवल एक अच्छा विचार होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके लिए निरंतर सीखने, प्रयोग करने और समस्याओं से समाधान की ओर बढ़ने की क्षमता आवश्यक है।विद्यार्थियों में विशेष रूप से निम्न क्षमताओं के विकास पर जोर दिया गया—रचनात्मक सोचजिज्ञासातार्किक एवं विश्लेषणात्मक सोचसमस्या समाधानप्रभावी संवादटीम भावनानेतृत्व क्षमतानवाचार क्षमतानिर्णय लेने की क्षमताप्रो. चौरे ने कहा कि विद्यार्थी भविष्य में केवल नौकरी प्राप्त करने वाले युवा ही नहीं, बल्कि नवाचारी, उद्यमी और रोजगार सृजक भी बन सकते हैं। इसके लिए विद्यालय स्तर से ही उनमें प्रश्न पूछने, प्रयोग करने, असफलताओं से सीखने और नए समाधान विकसित करने की आदत विकसित करना आवश्यक है।वास्तविक समस्याओं को नवाचार के अवसर के रूप में देखने का संदेशव्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया गया। स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण, ऊर्जा, खाद्य, शिक्षा, स्वच्छता और दैनिक जीवन से जुड़ी अनेक समस्याओं को नवीन विचारों में बदला जा सकता है।विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी भी विचार को आगे बढ़ाने से पहले यह समझना आवश्यक है कि समस्या वास्तविक है या नहीं, समाधान व्यवहारिक है या नहीं और उससे समाज को कितना लाभ मिल सकता है।विद्यार्थियों ने उद्यमिता एवं नवाचार से जुड़े विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं भी साझा कीं। प्रो. चौरे ने उनके प्रश्नों का समाधान करते हुए उन्हें अपने आसपास की समस्याओं की पहचान करने और उन पर छोटे-छोटे नवीन समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया।ए.के.एस. विश्वविद्यालय की टीम ने किया महत्वपूर्ण समन्वयकार्यक्रम के सफल संचालन एवं विद्यालयों के साथ समन्वय में ए.के.एस. विश्वविद्यालय की टीम के सदस्य श्री अविनाश मिश्रा, श्री रजत सिंह एवं श्री दीपक सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम द्वारा तीनों विद्यालयों के समन्वयकों एवं शिक्षकों के साथ लगातार समन्वय करते हुए कार्यक्रम की व्यवस्थाओं, सत्रों के संचालन एवं विद्यार्थियों की सहभागिता को सुनिश्चित किया गया।ए.के.एस. विश्वविद्यालय की ओर से तीनों विद्यालयों के प्राचार्यों, एसआईसी समन्वयकों, शिक्षकों एवं विद्यालय प्रशासन के सहयोग के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया गया।विद्यालय और विश्वविद्यालय के बीच नवाचार का सेतुडीआईसीई योजना के अंतर्गत ए.के.एस. विश्वविद्यालय की यह पहल विद्यालय स्तर पर नवाचार एवं उद्यमिता की संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि उनकी जिज्ञासा, रचनात्मकता और समस्याओं को देखने का अलग दृष्टिकोण भविष्य में नए समाधान, नवाचार और उद्यम का आधार बन सकता है।कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक करियर विकल्पों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें समस्या समाधानकर्ता, नवाचारी विचारक और भविष्य के उद्यमी के रूप में विकसित करना है।आगे भी जारी रहेगा उद्यमिता कौशल विकास अभियानए.के.एस. विश्वविद्यालय द्वारा डीआईसीई योजना के अंतर्गत विद्यालयी विद्यार्थियों के लिए उद्यमिता कौशल विकास एवं नवाचार जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों को आगे भी जारी रखने का प्रयास किया जा रहा है।इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों में “सोचें – सृजन करें – नवाचार करें – समाधान खोजें – उद्यमी बनें” की भावना विकसित करने तथा उन्हें भविष्य के नवाचार एवं उद्यमिता परिवेश के लिए तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।

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