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September 15, 2026

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धरमजयगढ़ में श्रीमद्भागवत कथा की अमृतवर्षा: सांसद राधेश्याम राठिया ने टेका माथा, कुंती स्तुति और शुकदेव आगमन के प्रसंग पर भावुक हुए श्रद्धालु

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​धरमजयगढ़ – नगर में आयोजित पितृ मोक्ष श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह में इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और अध्यात्म की त्रिवेणी बह रही है। कथा व्यास परम पूज्य पंडित श्री मुरारीलाल त्रिपाठी जी महाराज के श्रीमुख से बरस रही अमृतधारा में गोते लगाने रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पहुंच रहे हैं।


​रविवार को इस दिव्य आयोजन में रायगढ़ लोकसभा के लोकप्रिय सांसद राधेश्याम राठिया ने विशेष रूप से शिरकत की। उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण की पूजा-अर्चना कर कथा व्यास पंडित मुरारीलाल त्रिपाठी जी से आशीर्वाद ग्रहण किया और श्रद्धालुओं के साथ बैठकर कथा का श्रवण किया। सांसद के आगमन से आयोजकों एवं स्थानीय श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा गया।
​भावविभोर करने वाले प्रसंगों का हुआ जीवंत वर्णन
​कथा के चतुर्थ दिवस पर पूज्य महाराज श्री ने ‘कुंती स्तुति’, ‘महाराज परीक्षित का जन्म’, ‘परीक्षित को मिला श्राप’ तथा ‘परम ज्ञानी शुकदेव जी महाराज के आगमन’ का अत्यंत मर्मस्पर्शी व जीवंत वर्णन किया।
​कुंती स्तुति: महारानी कुंती द्वारा संकट के समय भी भगवान श्रीकृष्ण से विपत्ति मांगने के प्रसंग को समझाते हुए महाराज श्री ने कहा कि “दुख में ही ईश्वर का निरंतर स्मरण होता है, इसलिए विपत्ति भी वास्तव में भगवान का आशीर्वाद है।”


​परीक्षित जन्म व शुकदेव आगमन: महाराज परीक्षित के जन्म और उन्हें मिले श्राप के बाद मुक्ति का मार्ग दिखाने के लिए कथा स्थल पर शुकदेव जी के दिव्य प्राकट्य के प्रसंग ने समूचे वातावरण को भाव-विभोर कर दिया।


​जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध कराती है भागवत कथा
​कथा व्यास पंडित मुरारीलाल त्रिपाठी जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मनुष्य को उसके जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध कराने वाली परम औषधि है। यह कथा हमारे भीतर छिपे अहंकार को मिटाकर भक्ति, धर्म और सदाचार के दीप जलाती है। पितृ मोक्ष के लिए इस कथा का श्रवण महाकल्याणकारी है।


​संगीतभरी धुनों और पूज्य महाराज श्री के ओजस्वी विचारों से पूरा धरमजयगढ़ क्षेत्र “जय श्री कृष्णा” और “राधे-राधे” के जयघोष से गुंजायमान रहा। देर शाम तक चले इस धार्मिक अनुष्ठान में रायगढ़ क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं हजारों की संख्या में माताएं-बहनें व श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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