गांव की सड़क हुई लाल: हाथी के हमले में बुजुर्ग की दर्दनाक मौत, दहशत में ग्रामीण
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धरमजयगढ़ – धरमजयगढ़ वनमंडल क्षेत्र में हाथियों की लगातार मौजूदगी अब ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। वन विभाग के अभिलेखों में क्षेत्र में हाथियों की नियमित आवाजाही दर्ज होने के बीच मानव-हाथी संघर्ष की एक और दर्दनाक घटना सामने आई है। बाकारूमा वन परिक्षेत्र के जमाबीरा गांव में बीती रात हाथी के हमले में एक बुजुर्ग की मौत हो गई। हादसे के बाद गांव में मातम के साथ ही भय और दहशत का माहौल है।

मिली जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान रतन गुप्ता के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि गांव के भीतर सड़क किनारे पहले से हाथी की मौजूदगी थी। इसी दौरान रतन गुप्ता वहां से गुजर रहे थे। अंधेरे के कारण संभवतः उन्हें हाथी की मौजूदगी का अंदाजा नहीं हो सका। इसी बीच हाथी ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया और गंभीर रूप से कुचल दिया। इस दर्दनाक घटना में बुजुर्ग की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद सड़क पर फैला खून इस भयावह घटना की गवाही देता रहा।

सुबह जैसे ही घटना की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंची, बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जुट गए। सहमे हुए ग्रामीणों के बीच घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर भी चिंता दिखाई दी कि गांव और आबादी क्षेत्र के आसपास हाथियों की मौजूदगी लगातार बनी हुई है, ऐसे में रात के समय लोगों की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित की जा रही है।

सूचना मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे तथा घटना से संबंधित आवश्यक जांच और कार्रवाई शुरू की। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार रात के दौरान भी वन विभाग के कर्मचारी एक-दो बार क्षेत्र में पहुंचे थे। हालांकि घटना किन परिस्थितियों में हुई और हाथी की मौजूदगी को लेकर उस समय क्या सूचना थी, इसका स्पष्ट तथ्य विभागीय जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिस हाथी के हमले में बुजुर्ग की जान गई, उसकी मौजूदगी घटना के बाद भी आसपास के जंगल क्षेत्र में बताई जा रही है। इससे जमाविरा सहित आसपास के ग्रामीणों में भय और बढ़ गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि हाथी गांव की सीमा के आसपास ही विचरण करता रहा तो आगे भी मानव जीवन के लिए खतरा बना रह सकता है।
धरमजयगढ़ वनमंडल के कई हिस्सों में लंबे समय से हाथियों की आवाजाही की खबरें सामने आती रही हैं। वन क्षेत्र से लगे गांवों में रहने वाले लोगों के लिए हाथियों की मौजूदगी अब सामान्य वन्यजीव गतिविधि भर नहीं रह गई है, बल्कि रात के समय घर से बाहर निकलने से लेकर खेत और सड़क तक पहुंचने में भी ग्रामीणों को जोखिम उठाना पड़ रहा है।
एक बार फिर मानव-हाथी संघर्ष में एक जिंदगी चली गई। जमाविरा की यह घटना केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति नहीं, बल्कि उन तमाम ग्रामीणों की चिंता को भी सामने लाती है जो हाथियों के लगातार विचरण वाले इलाकों में भय के साये में जीवन जीने को मजबूर हैं। अब देखना होगा कि वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने और ग्रामीणों को समय रहते सतर्क करने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाता है।
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