केबल एवं वायर तकनीक में उद्योग-संलग्न शिक्षा की नई पहल, ए.के.एस. विश्वविद्यालय ने शुरू किए विशेष तकनीकी पाठ्यक्रम
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ए.के.एस. विश्वविद्यालय ने तकनीकी शिक्षा को उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ते हुए केबल एवं वायर प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विशेष डिप्लोमा, बी.टेक तथा एम.टेक कार्यक्रमों की शुरुआत कर एक नई शैक्षणिक दिशा निर्धारित की है। तेजी से विस्तारित हो रहे पावर एवं इलेक्ट्रिकल विनिर्माण क्षेत्र को ध्यान में रखकर तैयार किए गए ये पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि आधुनिक औद्योगिक दक्षता से भी सुसज्जित करेंगे।

इस अभिनव पहल को सशक्त आधार प्रदान करने के लिए विश्वविद्यालय ने यूसीएल केबल इंडस्ट्रीज के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) संपादित किया है। समझौते पर अनंत कुमार सोनी तथा यूसीएल के सहायक उपाध्यक्ष (एचआरडी) श्री मनोज तिवारी ने हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी उद्योग और शिक्षण संस्थान के बीच समन्वित सहयोग का ऐसा मॉडल प्रस्तुत करती है, जो विद्यार्थियों को सीधे औद्योगिक परिवेश से जोड़ने का कार्य करेगी।
नवप्रारंभित पाठ्यक्रमों के अंतर्गत विद्यार्थियों को उद्योग-उन्मुख प्रशिक्षण, अत्याधुनिक प्रयोगात्मक अभ्यास, इंटर्नशिप, लाइव इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स, औद्योगिक भ्रमण तथा अनुभवी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन का अवसर प्राप्त होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह पहल “लर्निंग विद इंडस्ट्री एक्सपोजर” की अवधारणा को साकार करेगी और विद्यार्थियों को रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विश्वविद्यालय अधिकारियों ने बताया कि यह सहयोग केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पाठ्यक्रम विकास, कौशल संवर्धन, अनुसंधान गतिविधियों तथा प्लेसमेंट सहायता जैसे क्षेत्रों में भी दोनों institutions के बीच सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करेगा।
इस अवसर पर यूसीएल के महाप्रबंधक श्री शैलेन्द्र सोनी ने कहा कि वर्तमान समय में ऊर्जा एवं केबल उद्योग तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जहाँ प्रशिक्षित और तकनीकी रूप से दक्ष मानव संसाधन की आवश्यकता निरंतर बढ़ रही है। ऐसे में यह साझेदारी विद्यार्थियों को उद्योग की वास्तविक चुनौतियों और आधुनिक तकनीकों से परिचित कराते हुए उन्हें भविष्य के लिए तैयार करेगी।
कार्यक्रम में बी.ए. चोपड़े, प्रो. जी.सी. मिश्रा, डॉ. शेखर मिश्रा, इंजीनियर आर.के. श्रीवास्तव, डॉ. उमेशकुमार सोनी तथा डॉ. रमा शुक्ला सहित अनेक शिक्षाविदों एवं उद्योग विशेषज्ञों की उपस्थिति रही। सभी वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता क्षेत्र में उद्योग–विश्वविद्यालय सहयोग का एक सशक्त उदाहरण बनेगा तथा तकनीकी शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, आधुनिक और रोजगारपरक स्वरूप प्रदान करेगा।
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