हाथियों की दस्तक से दहशत, ग्रामीण की मौत के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
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यशपाल जाट, शहडोल/केशवाही-


शहडोल जिले के केशवाही वन परिक्षेत्र अंतर्गत अमलाई क्षेत्र में हाथियों की लगातार मौजूदगी ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। बीती रात ग्राम गिरवा निवासी छोटेलाल सिंह की हाथी के हमले में मौत हो जाने के बाद वन विभाग की तैयारियों और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों की गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद समय रहते प्रभावी चेतावनी और सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए।
जानकारी के अनुसार हाथी अनूपपुर जिले के खोलगढ़ी क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए रामपुर बीट, बेलिया गांव होते हुए गिरवा तक पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि हाथी के मूवमेंट की सूचना विभाग को पहले से थी, इसके बावजूद गांवों में सतर्कता बढ़ाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई।
घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि संवेदनशील इलाकों में वन विभाग की गश्ती टीम सक्रिय नजर नहीं आई। लोगों का कहना है कि यदि समय पर निगरानी और अलर्ट सिस्टम प्रभावी रहता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाए हैं कि हाथियों की निगरानी और ग्रामीण सुरक्षा के लिए उपलब्ध संसाधनों का जमीनी स्तर पर कितना उपयोग हो रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक कई बार केवल औपचारिकताएं पूरी होती दिखाई देती हैं, जबकि प्रभावित गांवों में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर बनी रहती है।
ग्रामीणों ने केशवाही वन परिक्षेत्र के अधिकारियों से हाथियों की वास्तविक समय पर ट्रैकिंग, लगातार पेट्रोलिंग और गांवों में त्वरित सूचना तंत्र मजबूत करने की मांग की है। साथ ही घटना की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की भी मांग उठाई जा रही है।
बताया जा रहा है कि 14 मई की सुबह भी हाथी अमलाई वन क्षेत्र के आसपास मौजूद था, जिससे आसपास के गांवों में भय का वातावरण बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
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