मत्स्य क्षेत्र में स्टार्टअप की राह: एकेएस विश्वविद्यालय में विशेषज्ञों ने दिखाए नए अवसर एकेएस विश्वविद्यालय,
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सतना में रविवार को “मत्स्य क्षेत्र में उद्यमिता विकास” विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला ने छात्रों और शोधार्थियों के सामने स्वरोजगार की नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए। कृषि एवं तकनीकी संकाय द्वारा ई-ब्लॉक स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं और बाजार की मांग को जोड़ते हुए मत्स्य पालन को लाभकारी उद्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया।

कार्यशाला के मुख्य अतिथि प्रोफेसर सुषांत पुनेकर (शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, महू) ने कहा कि “मत्स्य पालन अब केवल परंपरागत व्यवसाय नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तकनीकों और नवाचार के माध्यम से उच्च आय देने वाला स्टार्टअप मॉडल बन चुका है।” उन्होंने मीठे और खारे जल में उत्पादन की उन्नत विधियों, रखरखाव, गुणवत्ता नियंत्रण और राष्ट्रीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।विशेषज्ञों ने बताया कि देश में मत्स्य क्षेत्र तेजी से उभरता हुआ उद्योग है, जहां युवाओं के लिए स्वरोजगार और स्टार्टअप की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। प्रोफेसर आर.सी. त्रिपाठी ने राष्ट्रीय नीतियों और योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सही मार्गदर्शन और तकनीकी ज्ञान से ग्रामीण क्षेत्र के युवा भी इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। वहीं डॉ. रमा शर्मा ने उत्पादन तकनीकों और विविध जल स्रोतों में मत्स्य पालन की व्यावहारिक जानकारी साझा की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलगुरु डॉ. बी.ए. चोपड़े ने तकनीकी परामर्श की आवश्यकता पर जोर देते हुए छात्रों को नवाचार आधारित उद्यमिता अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि छात्रों को आत्मनिर्भर बनाना भी है।कार्यशाला में बड़ी संख्या में छात्रों, शोधार्थियों और प्राध्यापकों की सक्रिय भागीदारी रही। इस अवसर पर प्रोफेसर जी.सी. मिश्रा, डॉ. नीरज वर्मा, डॉ. बी.डी. द्विवेदी, डॉ. वृंदावन, डॉ. डुमर सिंह, डॉ. अजीत सराठे, अनूप शुक्ला और डॉ. विष्णु ओमर सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर आर.सी. त्रिपाठी ने किया, जबकि आयोजन का नेतृत्व डीन डॉ. ए.के. भोमिक और शोध निदेशक डॉ. नीरज वर्मा के निर्देशन में संपन्न हुआ।
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