हरियाली, करुणा और जन-जागरण का संगम: शाकुंतलम पार्क समिति एवं नमः ग्रामीण विकास संस्था ने जगाई प्रकृति संरक्षण की अलख
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सतना। बढ़ती गर्मी, घटते जलस्रोत और प्यास से व्याकुल पशु-पक्षियों के बीच यदि कोई संस्था संवेदनाओं को कर्म में बदल रही है, तो वह है शाकुंतलम पार्क समिति और नमः ग्रामीण विकास संस्था, माधवगढ़। दोनों संस्थाओं द्वारा पर्यावरण संरक्षण, जीव सेवा, स्वच्छता जागरूकता और सामाजिक उत्तरदायित्व को लेकर चलाया जा रहा अभियान समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनता जा रहा है।

शाकुंतलम पार्क समिति द्वारा शहर एवं आसपास के क्षेत्रों में हरियाली संवर्धन, स्वच्छता जागरूकता, जल संरक्षण तथा पशु-पक्षियों के लिए जलपात्र एवं दाना-पानी की व्यवस्था जैसे कार्य निरंतर किए जा रहे हैं। समिति का मानना है कि प्रकृति केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है और इसकी रक्षा प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर पौधरोपण, स्वच्छता अभियान और जन-जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का बोध कराया जा रहा है।
वहीं नमः ग्रामीण विकास संस्था घायल, बीमार और असहाय पशुओं की सेवा को अपना धर्म मानकर कार्य कर रही है। संस्था द्वारा पशुओं के उपचार, संरक्षण और देखभाल के साथ-साथ लोगों में जीवों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। संस्था का यह मानवीय अभियान यह संदेश देता है कि किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसके कमजोर और असहाय जीवों के प्रति व्यवहार से होती है।
संस्था केवल जीव सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य कर रही है। संस्था के स्व-सहायता समूह महिलाओं को स्वरोजगार, कौशल विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ रहे हैं। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए नियमित अभियान भी संचालित किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित पर्यावरण प्रेमियों और गणमान्य नागरिकों ने कहा कि आज केवल वृक्षारोपण पर्याप्त नहीं है, बल्कि वृक्षों का संरक्षण, जल का संवर्धन और जीव-जंतुओं के प्रति करुणा ही वास्तविक पर्यावरण सेवा है। सभी ने मिलकर हरियाली बढ़ाने, स्वच्छता बनाए रखने तथा पशु-पक्षियों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया।
शाकुंतलम पार्क समिति के अध्यक्ष सत्य भूषण सिंह ने कहा कि प्रकृति, पशु-पक्षी और मानव एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि हम पर्यावरण की रक्षा करेंगे तो आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध भविष्य मिलेगा। उन्होंने सभी नागरिकों से अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। साथ ही शाकुंतलम पार्क परिसर में निर्माणाधीन मंदिर के लिए समाज के लोगों से स्वेच्छा से सहयोग प्रदान करने की अपील करते हुए कहा कि यह मंदिर केवल श्रद्धा और आस्था का केंद्र ही नहीं होगा, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और जनहित गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
नमः ग्रामीण विकास संस्था के अध्यक्ष अर्पित द्विवेदी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और जीव सेवा मानवता की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य प्रकृति, पशु-पक्षियों और समाज के बीच संवेदनशील एवं संतुलित संबंध स्थापित करना है। उन्होंने नागरिकों से जल संरक्षण, स्वच्छता और जीवों के प्रति दया एवं संवेदनशीलता अपनाने की अपील करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
समिति के संरक्षक रामकलेश तिवारी, श्रीराम दुबे एवं सुरेश पांडे ने नागरिकों से अपने घरों, मोहल्लों और सार्वजनिक स्थलों पर पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करने तथा पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में वार्ड क्रमांक 7 के पार्षद आदित्य यादव, वार्ड क्रमांक 8 के पार्षद प्रतिनिधि अज्जू यादव, पूर्व पार्षद शैलेन्द्र दाहिया, युवा समाजसेवी अजय दुबे, जायशा छावरे (अध्यक्ष, कल्पतरु वेलफेयर सोसाइटी), गरिमा सिंह (एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक), भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष शिब्बू त्रिपाठी, नगर मंडल महामंत्री केशव कोरी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में कार्यकर्ता सदस्य शैलेश चौधरी, स्नेहा तिवारी, लवली चिकवा एवं सुजीत चतुर्वेदी सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों और नागरिकों ने सहभागिता की।
प्रकृति के प्रति प्रेम, जीवों के प्रति करुणा, स्वच्छता के प्रति जागरूकता और समाज के प्रति जिम्मेदारी का यह अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि जब समाज एकजुट होकर प्रकृति और जीव-जंतुओं के संरक्षण का संकल्प लेता है, तब छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े परिवर्तन की मजबूत नींव बन जाते हैं। :::
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