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राजस्व विभाग की लापरवाही या मिलीभगत? 150 एकड़ शासकीय भूमि पर दबंगों का कब्ज़ा, मक्के की फसल से कमा रहे लाखों — राजस्व विभाग ने सिर्फ़ 3 घंटे में दिखाया ‘कागज़ी एक्शन’!

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सिवनी (म.प्र.) से रिपोर्ट:
सवाल उठता है — जब सरकार “पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ” और “गाय पालो, गांव बचाओ” जैसे नारे देती है, तो क्या ज़मीनी स्तर पर ये नारे बस दीवारों तक सीमित हैं?



जिले के ग्राम बांद्रा पटवारी हल्का नंबर 45  में लगभग 150 एकड़ शासकीय भूमि पर 16 अतिक्रमणधारियों ने वर्षों से कब्जा कर रखा है। इन लोगों ने न केवल शासन की भूमि पर अवैध रूप से मक्का और धान की खेती कर लाखों की कमाई की, बल्कि उस भूमि पर मौजूद छोटे झाड़ के जंगलों का सफाया भी कर दिया — जो पहले ग्रामीणों की गायों के चरने की भूमि मानी जाती थी।



📜 कागज़ों में कार्रवाई — ज़मीन पर कब्ज़ा बरकरार!

2022 में इस मामले को लेकर राजस्व प्रकरण क्रमांक 0016/अ/2022–23 तहसीलदार सिवनी के समक्ष पंजीबद्ध किया गया।
13 सितंबर 2022 को 10 अतिक्रमणधारियों ने नोटिस का जवाब देते हुए स्वयं स्वीकार किया कि वे पिछले 30 वर्षों से शासकीय भूमि पर खेती कर रहे हैं।



फिर भी, तहसील और राजस्व विभाग की कार्रवाई सिर्फ़ कागज़ों तक सीमित रही।
सिर्फ़ 3 घंटे में “रिपोर्ट तैयार” कर मामला निपटा देने का दावा विभाग ने किया, लेकिन जमीनी हकीकत में अतिक्रमण आज भी जस का तस है।



🌳 जंगल काटने वालों पर कार्रवाई कहाँ?

वो भूमि कभी छोटे झाड़ के जंगलों से आच्छादित थी — जो पर्यावरण और ग्रामीण जीवन के लिए महत्वपूर्ण थे।
अब वहाँ सिर्फ़ फसलें हैं और दबंगों के ट्रैक्टर।
प्रश्न यह है कि —
👉 क्या इन झाड़-जंगलों को नष्ट करने वालों पर कोई वन अपराध प्रकरण दर्ज हुआ?
👉 क्या राजस्व निरीक्षक, पटवारी या तहसीलदार की भूमिका की जांच हुई?
अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।



⚖️ रोटी–बेटी का बहिष्कार और धमकियाँ — कानून कहाँ है?

बांद्रा निवासी महेंद्र राय ने 22 जुलाई 2022 को तहसीलदार सिवनी के समक्ष अतिक्रमण हटाने के लिए आवेदन दिया था।
लेकिन इस न्यायिक प्रयास के बदले उन्हें समाज से बहिष्कार का सामना करना पड़ा।



अवैध कब्जाधारियों ने धनमती इनवाती के विरुद्ध खाप पंचायत बैठाकर फरमान जारी किया कि जो अतिक्रमण के खिलाफ बोलेगा,
👉 धनमति की “रोटी-बेटी का संबंध” खत्म किया जाएगा,
👉 मजदूरी पर रोक लगाई जाएगी,
👉 और ₹1,00,000 का अर्थदंड देना होगा।

इतना ही नहीं, विरोध करने वालों को जान से मारने की धमकियाँ भी दी गईं।
इन घटनाओं की शिकायत 2 अगस्त 2022 को पुलिस अधीक्षक, जिला कलेक्टर सिवनी और बंडोल थाना में की गई, शिकायत पिछले 4 वर्षों जारी है।
परंतु आज तक वह शिकायत धूल खा रही है — किसी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं।



🚨 पेयजल में जहर जैसी साज़िश!

सूत्रों के अनुसार, ग्राम के सार्वजनिक पेयजल स्रोत पर कीटनाशक दवा का छिड़काव भी किया गया —
ताकि अतिक्रमण के विरोध में उठ रही आवाज़ों को दबाया जा सके।
यह कृत्य न केवल आपराधिक है बल्कि मानवता के खिलाफ भी।



🧾 प्रश्न जो जवाब मांगते हैं:

1. जब अतिक्रमणधारी स्वयं स्वीकार कर चुके हैं, तो भूमि मुक्त क्यों नहीं कराई गई?

2. छोटे झाड़ के जंगल को काटने वालों पर क्या वन विभाग ने कोई मामला दर्ज किया?

3. समाज से बहिष्कार और धमकी देने वालों पर क्या पुलिस ने FIR दर्ज की?


4. आखिर न्याय व्यवस्था कब इन ग्रामीणों को राहत देगी?

🕵️‍♂️ निष्कर्ष:

यह मामला सिर्फ़ भूमि अतिक्रमण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता, पर्यावरण विनाश, और सामाजिक अन्याय का प्रतीक है।
जब तक ऐसे मामलों में राजस्व, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते,
तब तक “पेड़ लगाओ–गांव बचाओ” जैसे नारे बस औपचारिक रहेंगे।

                            उद्घोष समय न्यूज
                        मध्य प्रदेश संवाददाता
                             कैलाश लाहोरी

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