128 परिवारों का भविष्य अनिश्चित, केपीसीएल से मांगा पुनर्वास का पूरा खाका
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धरमजयगढ़ – कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (केपीसीएल) की प्रस्तावित कोयला खदान की राह फिलहाल आसान नजर नहीं आ रही है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक, छत्तीसगढ़ ने परियोजना से जुड़े कुल 18 बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी और स्पष्टीकरण तलब किया है, लेकिन इनमें सबसे बड़ा और सबसे संवेदनशील मुद्दा 6 गांवों के 128 प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन का माना जा सकता है।
जानकारी के अनुसार परियोजना से 128 परिवार प्रभावित होंगे, लेकिन उनके पुनर्वास की क्या व्यवस्था होगी, योजना किस स्थिति में है और प्रभावित लोगों को किस प्रकार बसाया जाएगा, इस संबंध में उपलब्ध जानकारी को पर्याप्त नहीं माना गया। इसी कारण प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
यही नहीं, अभिलेखों में दर्ज अन्य प्रश्न भी कम गंभीर नहीं हैं। उपग्रह चित्रों में दिखाई दे रही बस्तियों, कृषि भूमि, सड़कों तथा अन्य मानवीय गतिविधियों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। लगभग 5.918 हेक्टेयर क्षेत्र को अविचलित वन क्षेत्र बताए जाने का आधार पूछा गया है। दुर्लभ वनस्पतियों और वन्यजीवों पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत आकलन भी मांगा गया है। साथ ही नई कोयला खदान खोलने की आवश्यकता का ठोस औचित्य प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इन तथ्यों से स्पष्ट है कि परियोजना केवल वन भूमि के उपयोग का मामला नहीं रह गई है, बल्कि सैकड़ों लोगों के भविष्य, आजीविका और पुनर्वास का प्रश्न भी इसके केंद्र में आ गया है। यही कारण है कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने एक-दो नहीं, बल्कि 18 अलग-अलग बिंदुओं पर जानकारी मांगते हुए परियोजना के हर महत्वपूर्ण पहलू की पड़ताल शुरू कर दी है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग और परियोजना प्रबंधन इन सवालों के कितने संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत कर पाते हैं। क्योंकि जब तक विशेषकर 128 प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का स्पष्ट खाका सामने नहीं आता, तब तक परियोजना की वन स्वीकृति प्रक्रिया पर यह सवाल बना रह सकता है।
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