पुरुंगा कोल ब्लॉक के लिए क्या ग्राम पंचायतों से मिल गया एनओसी ? या बिना ग्रामसभा सहमति के आगे बढ़ रही प्रक्रिया?
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फाइल फोटो
धरमजयगढ़ वन मण्डल अंतर्गत प्रस्तावित पुरुंगा कोल ब्लॉक से जुड़े एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ ने परियोजना की प्रक्रिया को लेकर नए प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जिसमें यह उल्लेख किया गया है कि रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वनमंडल अंतर्गत प्रस्तावित पुरुंगा कोल ब्लॉक में कोयला खनन के लिए 621.331 हेक्टेयर राजस्व भूमि और 247.694 हेक्टेयर वनभूमि, कुल 869.025 हेक्टेयर भूमि का उपयोग प्रस्तावित है।
दस्तावेज में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि “कोयला खनन एवं अन्य कार्यों के लिए संबंधित ग्राम एवं ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त कर प्रस्तुत कर दिया जाएगा।” जैसा कथन है , यह कथन स्पष्ट करता है कि उस समय कंपनी ने संबंधित ग्राम एवं ग्राम पंचायतों से एनओसी प्राप्त कर प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया था।
यहीं से कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े होते हैं। यदि दस्तावेज़ में स्वयं एनओसी प्राप्त कर प्रस्तुत करने की बात लिखी गई थी, तो क्या बाद621.331 में प्रभावित सभी ग्राम पंचायतों और ग्रामसभाओं से विधिवत अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किए गए? यदि हाँ, तो वे कब प्राप्त हुए, किन-किन ग्रामसभाओं में प्रस्ताव पारित हुए और उनके अभिलेख कहाँ उपलब्ध हैं? यदि नहीं, तो परियोजना की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ी ?
पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में ग्रामसभा की सहमति और स्थानीय समुदाय की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में दस्तावेज़ में एनओसी प्राप्त करने का स्पष्ट उल्लेख इस विषय को सार्वजनिक महत्व का बना देता है।
अब स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन और संबंधित एजेंसियां सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करें कि पुरुंगा कोल ब्लॉक से प्रभावित किन-किन ग्राम पंचायतों से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त हुए हैं, उनकी प्रमाणित प्रतियां और ग्रामसभा के प्रस्ताव सार्वजनिक किए जाएं, ताकि पूरे मामले में पारदर्शिता बनी रहे।
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