1 जुलाई से बदलेगा ग्रामीण रोजगार का चेहरा, मनरेगा की जगह लागू होगा नया कानून
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देश की ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में 1 जुलाई से ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। करीब 20 वर्षों से लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की जगह अब विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) कानून लागू होगा। केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित यह नई व्यवस्था बुधवार से पूरे देश में प्रभावी हो जाएगी।
नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों के बजाय 125 दिनों तक रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। सरकार का दावा है कि यह व्यवस्था केवल मजदूरी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्रामीण आजीविका, कौशल विकास, आधारभूत संरचना निर्माण, जल संरक्षण, ग्रामीण संपर्क मार्ग और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण पर भी विशेष जोर देगी।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में चल रहे कार्यों और श्रमिकों के रोजगार पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। मनरेगा के तहत स्वीकृत कार्यों को नई व्यवस्था में समाहित किया जाएगा ताकि संक्रमण की प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी हो सके।
हालांकि इस बदलाव को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज है। कई राज्यों ने प्रारंभ में इसका विरोध किया था, लेकिन अब अधिकांश राज्यों ने नई व्यवस्था लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। समर्थकों का कहना है कि इससे ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी, जबकि आलोचकों का मानना है कि नई व्यवस्था की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
ग्रामीण भारत के लिए 1 जुलाई केवल एक नई तारीख नहीं, बल्कि रोजगार और विकास की नई नीति की शुरुआत मानी जा रही है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि नई व्यवस्था ग्रामीण अर्थव्यवस्था और श्रमिकों के जीवन में कितना बदलाव ला पाती है।
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