विश्व पर्यावरण दिवस विशेषविंध्य के ग्रामीण अंचल में एआई और मशीन लर्निंग से तैयार हो रहे हैं भविष्य के ‘ग्रीन टेक’ लीडर्स
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सतना। विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के अवसर पर एकेएस विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रोफेसर एवं डीन डॉ. अखिलेश ए. वाऊ ने कहा कि आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, जल संकट और प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, तब तकनीक को केवल आर्थिक विकास का माध्यम मानना पर्याप्त नहीं है।

आवश्यकता इस बात की है कि आधुनिक तकनीक को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रभावी साधन के रूप में भी विकसित किया जाए।डॉ. वाऊ के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसी तकनीकें आने वाले समय में पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली हैं। उन्होंने कहा कि एक समय था जब इन तकनीकों तक पहुंच केवल बड़े महानगरों और चुनिंदा तकनीकी संस्थानों तक सीमित थी, लेकिन आज विंध्य क्षेत्र के ग्रामीण और अर्धशहरी पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थी भी इन क्षेत्रों में दक्षता प्राप्त कर रहे हैं और वैश्विक समस्याओं के समाधान तलाशने की क्षमता विकसित कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि एकेएस विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग में संचालित बीटेक, एमटेक, बीसीए, एमसीए एवं डिप्लोमा कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा नहीं दी जा रही, बल्कि उन्हें शोध, नवाचार और वास्तविक जीवन की समस्याओं पर आधारित तकनीकी समाधानों के विकास के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभाग में एआई, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग तथा आईओटी जैसे क्षेत्रों में आधुनिक शिक्षण और अनुसंधान सुविधाएं उपलब्ध हैं।डॉ. वाऊ ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। ऐसे में एआई और डेटा साइंस आधारित तकनीकों का उपयोग करके जलवायु-अनुकूल कृषि मॉडल विकसित किए जा सकते हैं। सेंसर और आईओटी आधारित प्रणालियों के माध्यम से मिट्टी की नमी, मौसम की स्थिति और सिंचाई की आवश्यकताओं का सटीक विश्लेषण कर किसानों को बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है। इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जल और ऊर्जा जैसे संसाधनों का भी संरक्षण संभव है।उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य की तकनीकी शिक्षा केवल रोजगार तक सीमित नहीं रह सकती। विद्यार्थियों को ऐसे नवाचारों के लिए प्रेरित करना होगा जो ऊर्जा संरक्षण, ग्रीन कंप्यूटिंग, स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन, ई-वेस्ट नियंत्रण और कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक योगदान दे सकें। तकनीक का वास्तविक उद्देश्य केवल उद्योगों के लिए मानव संसाधन तैयार करना नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण की समस्याओं का समाधान विकसित करना भी होना चाहिए।डॉ. वाऊ ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी-13) ‘क्लाइमेट एक्शन’ की प्राप्ति में शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। विश्वविद्यालयों को ऐसे युवाओं का निर्माण करना होगा जो तकनीकी रूप से दक्ष होने के साथ-साथ पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील भी हों। इसी सोच के साथ एकेएस विश्वविद्यालय विद्यार्थियों में नवाचार, अनुसंधान और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का प्रयास कर रहा है।उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस केवल पौधारोपण या जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह भविष्य की उस विकास प्रक्रिया पर विचार करने का अवसर भी है जिसमें तकनीक और प्रकृति एक-दूसरे के पूरक बन सकें। विंध्य क्षेत्र के युवा आज एआई, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से न केवल अपने करियर को नई दिशा दे रहे हैं, बल्कि एक हरित, सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य के निर्माण में भी योगदान देने की क्षमता विकसित कर रहे हैं। यही युवा आने वाले समय के वास्तविक ‘ग्रीन टेक लीडर्स’ होंगे।
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