ए.के.एस. विश्वविद्यालय के शोधार्थियों का शोध आलेख अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका में प्रकाशित।
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सतना। ए.के.एस. विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. धीरेंद्र ओझा एवं उनकी शोधार्थी ज्योति सिंह द्वारा संयुक्त रूप से लिखित शोध आलेख “लघु उद्योगों में वस्तु एवं सेवा कर का उपभोक्ता अनुपालन पर प्रभाव” अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित शोध पत्रिका अंतरराष्ट्रीय उन्नत अनुसंधान विज्ञान, संचार एवं प्रौद्योगिकी शोध पत्रिका के खंड-6, अंक-5 (मार्च 2026) में प्रकाशित हुआ है।

शोध आलेख में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के पश्चात लघु एवं मध्यम उद्योगों पर पड़े प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। अध्ययन के अनुसार जीएसटी व्यवस्था ने कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया है तथा उपभोक्ताओं में पक्के बिल प्राप्त करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया है, जिससे कर अपवंचन पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है। शोध में यह भी पाया गया कि डिजिटल भुगतान तथा इलेक्ट्रॉनिक चालान प्रणाली ने व्यापारिक लेन-देन को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं उत्तरदायी बनाया है।
शोधार्थियों के अनुसार जीएसटी ने देश में एकीकृत कर व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए लघु उद्योगों के लिए राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच को सरल बनाया है। यद्यपि प्रारंभिक चरण में छोटे व्यापारियों को ऑनलाइन विवरणी प्रस्तुत करने एवं तकनीकी प्रक्रियाओं से संबंधित चुनौतियों का सामना करना पड़ा, किंतु समय के साथ जागरूकता, प्रशिक्षण एवं शासकीय सहयोग के कारण इन कठिनाइयों में उल्लेखनीय कमी आई है।
अध्ययन में यह निष्कर्ष भी सामने आया कि उपभोक्ताओं में कर संबंधी जागरूकता बढ़ने से बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहन मिला है। शासन द्वारा समय-समय पर जारी किए गए सरल दिशा-निर्देशों तथा डिजिटल सुविधाओं ने उपभोक्ता अनुपालन को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
डॉ. धीरेंद्र ओझा एवं शोधार्थी ज्योति सिंह का मत है कि यदि लघु उद्योगों को तकनीकी प्रशिक्षण, सरल जीएसटी प्रक्रियाएं तथा वित्तीय सहायता निरंतर उपलब्ध कराई जाती रहे, तो यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था को और अधिक गति प्रदान कर सकता है। यह शोध आलेख वर्तमान कर व्यवस्था, उपभोक्ता व्यवहार तथा लघु उद्योगों के विकास के संदर्भ में महत्वपूर्ण निष्कर्ष प्रस्तुत करता है।
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