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फेस मैचिंग की समस्या से जूझ रहा मनरेगा का तालाब निर्माण, मजदूरों की मेहनत पर तकनीकी अड़चन भारी !

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धरमजयगढ़ – गरीब मजदूरों के लिये रोजगार की गारंटी दिलाने वाली योजना मनरेगा जिसे आगामी दिनों में VB G RAM G यानि (विकसित भारत रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण )के नाम से जाना जायेगा कई चुनौतियों से जूझ रहा है, जिसमें सबसे बड़ी समस्या फेस ऑथेंटिकेशन की है , वर्तमान में मजदूरों की हाजिरी भरने के लिये मोबाइल के माध्यम से चेहरे की पहचान करना आवश्यक है , लेकिन कभी नेटवर्क की समस्या, तो कभी सर्वर की दिक्कत तो कभी अन्य तकनीकी कारणों से मजदूरों की हाजिरी भरने में दिक्क़ते आ रही हैं , मनरेगा का कार्य जून तक पूर्ण किया जाना है, लेकिन यह समस्या मनरेगा के कार्य को निर्धारित समय सीमा में पूर्ण करने की दिशा में एक बड़ी बाधा बनकर उभरी है ! इसका ताज़ा उदाहरण ग्राम पंचायत नवागांव में देखने को मिला !जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत नवागांव में लगभग 19 लाख रुपये की लागत से तालाब निर्माण का कार्य चल रहा है। यह तालाब केवल मिट्टी खोदने का काम नहीं है, बल्कि गांव के किसानों के लिए पानी की उम्मीद, पशुओं के लिए निस्तारी का साधन और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी संपत्ति है। यही कारण है कि सैकड़ों मजदूर भीषण गर्मी और तपती धूप के बावजूद पूरे समर्पण के साथ इस कार्य में जुटे हुए हैं।
लेकिन इन मेहनतकश हाथों के सामने अब फावड़ा और तसला नहीं, बल्कि तकनीक की एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। नई व्यवस्था के तहत मजदूरों की उपस्थिति चेहरे के मिलान यानी फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से दर्ज की जाती है। रोजगार सहायक अनिता गुप्ता और मेट शांति बताती हैं कि कई बार मजदूरों का चेहरा सिस्टम से मेल नहीं खाता, जिसके कारण उनकी हाजिरी दर्ज नहीं हो पाती। दिनभर कड़ी मेहनत करने वाले मजदूरों के मन में यह चिंता बनी रहती है कि कहीं उनका श्रम रिकॉर्ड में दर्ज ही न हो पाए।


गांव के कई मजदूरों के लिए यह केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि उनके परिवार के चूल्हे से जुड़ा सवाल है। जब मजदूरी ही जीवनयापन का मुख्य साधन हो, तब हाजिरी दर्ज न होने का डर उन्हें काम पर आने से भी रोकने लगा है। परिणामस्वरूप कार्य की गति प्रभावित हो रही है और जून माह के अंत तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य भी चुनौतीपूर्ण दिखाई देने लगा है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले ही अपेक्षाकृत कम मजदूरी और श्रमिकों की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रही योजना में यह नई तकनीकी बाधा गरीब मजदूरों के लिए अतिरिक्त बोझ बन गई है। जिन लोगों के हाथों में गांव के विकास की जिम्मेदारी है, वे अब मोबाइल स्क्रीन पर अपने चेहरे के सफल मिलान का इंतजार करने को मजबूर हैं।


इस बीच रोजगार सहायक द्वारा कार्यस्थल पर मजदूरों के लिए पेयजल, छाया, फर्स्ट एड बॉक्स सहित आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था अपने निजी व्यय से किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय स्तर पर कर्मचारी और मजदूर दोनों ही काम को समय पर पूरा करने के लिए पूरी निष्ठा से प्रयास कर रहे हैं।


आज नवागांव का यह तालाब केवल एक निर्माणाधीन परियोजना नहीं, बल्कि ग्रामीण श्रमिकों के संघर्ष, उम्मीद और धैर्य की कहानी बन गया है। मजदूरों में काम करने का जज्बा है, कर्मचारियों में जिम्मेदारी निभाने की इच्छा है, लेकिन तकनीकी खामियां उनकी राह में दीवार बनकर खड़ी हैं। ऐसे में आवश्यकता इस बात की है कि संबंधित विभाग जल्द से जल्द कोई व्यावहारिक समाधान निकाले, ताकि मजदूरों की मेहनत को उसका पूरा सम्मान मिल सके और गांव के विकास की यह महत्वपूर्ण परियोजना समय पर पूरी हो सके।

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