ए.के.एस. विश्वविद्यालय और सोलार इंडस्ट्रीज का ऐतिहासिक समझौता, विंध्य क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा और खनन उद्योग को मिलेगी नई दिशा
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सतना। तकनीकी शिक्षा, औद्योगिक नवाचार और रोजगार सृजन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए एकेएस यूनिवर्सिटी ने देश की अग्रणी औद्योगिक कंपनी सोलार इंडस्ट्रीज इंडिया के साथ महत्वपूर्ण मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता केवल एक औपचारिक साझेदारी नहीं, बल्कि शिक्षा और उद्योग जगत के बीच ऐसा सशक्त सेतु माना जा रहा है, जो आने वाले समय में खनन एवं निर्माण उद्योगों के स्वरूप को नई दिशा दे सकता है।

एमओयू पर सोलार इंडस्ट्रीज की ओर से हेड टेक्निकल सर्विसेज इंडिया योगेंद्र निगम ने हस्ताक्षर किए जबकि विश्वविद्यालय की ओर से विश्वविद्यालय के प्रोचांसलर अनंत कुमार सोनी ने हस्ताक्षर किए। कार्यक्रम का सफल समन्वयन विश्वविद्यालय के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर बालेन्द्र विश्वकर्मा द्वारा किया गया। इस गौरवपूर्ण अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो चांसलर अनंत कुमार सोनी, कुलपति प्रोफेसर बी.ए. चोपड़े तथा इंजीनियरिंग संकाय के डीन डॉ.जी.के.प्रधान विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान दोनों संस्थानों के प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे को मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग की प्रतियां सौंपकर दीर्घकालिक सहयोग और विश्वास का संदेश दिया।इस एमओयू के माध्यम से उद्योग और अकादमिक जगत मिलकर खनन एवं निर्माण क्षेत्र के विकास के लिए अत्याधुनिक तकनीकों, अनुसंधान और नवाचार पर कार्य करेंगे। ड्रिलिंग एवं ब्लास्टिंग जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में संयुक्त रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को वैश्विक औद्योगिक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण प्राप्त होगा। यह साझेदारी विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें वास्तविक औद्योगिक परिस्थितियों में कार्य करने का अवसर भी प्रदान करेगी। समझौते के अंतर्गत उन्नत तकनीकों, आधुनिक उत्पादों और शोध-आधारित सेवाओं के विकास हेतु दोनों संस्थान मिलकर कार्य करेंगे। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को लाइव इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स, विशेषज्ञ व्याख्यान, इंडस्ट्रियल विजिट, रिसर्च अवसर तथा अत्याधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। इससे विद्यार्थियों में व्यावहारिक दक्षता विकसित होगी और वे भविष्य की औद्योगिक चुनौतियों के लिए तैयार हो सकेंगे। इस साझेदारी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रत्येक वर्ष डिप्लोमा एवं बी.टेक माइनिंग इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के लिए विशेष प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित की जाएगी। इससे विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थानों में रोजगार प्राप्त करने का अवसर मिलेगा और उद्योगों को प्रशिक्षित एवं कुशल तकनीकी मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इसे “शिक्षा, उद्योग और नवाचार के त्रिवेणी संगम” की संज्ञा देते हुए कहा कि यह समझौता विंध्य क्षेत्र के युवाओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल तकनीकी शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक मानकों से जोड़ते हुए मध्यप्रदेश को खनन एवं औद्योगिक अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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