उधर खुदाई करता रहा डीबीएल, इधर बिकता रहा धान… अब खेती योग्य बनाने की मांग क्यों ?
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धरमजयगढ़ – रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत सिसरिंगा में भारतमाला सड़क निर्माण परियोजना से जुड़ा अमृत सरोवर तालाब विवाद अब लगातार गहराता जा रहा है। सड़क निर्माण एजेंसी मेसर्स दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड (DBL) द्वारा दी गई सफाई और सरकारी रिकॉर्ड में सामने आए तथ्यों ने पूरे मामले को संदेह और सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।
दरअसल, अमृत सरोवर तालाब को प्रभावित कर मिट्टी उत्खनन किए जाने के आरोपों के बीच डीबीएल कंपनी ने अपनी ओर से कहा है कि सड़क निर्माण कार्य में उपयोग के लिए मिट्टी और मुरूम उत्खनन एक स्थानीय किसान के साथ हुए एग्रीमेंट के आधार पर कराया जा रहा था। कंपनी के अनुसार 8 अप्रैल 2024 को हुए करार में यह स्पष्ट उल्लेख था कि उत्खनन के बाद संबंधित भूमि समतल होकर कृषि योग्य बन जाएगी। कंपनी का यह भी कहना है कि पंचायत द्वारा आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद कार्य रोक दिया गया।
लेकिन अब यही मामला कई नए सवालों को जन्म दे रहा है। एक ओर संबंधित किसान डीबीएल कंपनी द्वारा मिट्टी उत्खनन किए जाने से अपनी जमीन खराब होने और खेती प्रभावित होने की बात कहते हुए उसे फिर से खेती योग्य बनाने की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर स्वतंत्र पड़ताल में सामने आए सरकारी रिकॉर्ड ने पूरे मामले को और उलझा दिया है। जानकारी के अनुसार जिस खसरा नंबर 840/1/ग़ की भूमि पर डीबीएल कंपनी मिट्टी खुदाई का दावा कर रही है, उसी भूमि से लगातार धान विक्रय दर्ज होना सामने आया है।
यही तथ्य अब सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है कि यदि जमीन उत्खनन के कारण खेती योग्य नहीं बची थी तो उसी खसरा नंबर से लगातार धान बिक्री कैसे होती रही। वहीं यदि धान विक्रय हो रहा था तो अब जमीन को खेती योग्य बनाने की मांग किन परिस्थितियों में उठाई जा रही है, यह भी चर्चा का विषय बन गया है।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित भूमि के चारों तरफ शासकीय भूमि स्थित है। पंचायत प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि मिट्टी उत्खनन के दौरान अमृत सरोवर तालाब भी प्रभावित हुआ है। ऐसे में अब यह विवाद केवल मिट्टी खुदाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें सरकारी भूमि, तालाब संरक्षण, भूमि उपयोग और धान विक्रय जैसे कई संवेदनशील पहलू जुड़ चुके हैं।
ग्रामीणों के बीच भी इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं। लोगों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से की गई तो कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल पूरे मामले ने प्रशासन, पंचायत और निर्माण एजेंसी तीनों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में आखिर सच क्या सामने आता है और अमृत सरोवर तालाब व कथित प्रभावित भूमि को लेकर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।
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