बायसी, बायसी कॉलोनी सहित 6 गांव होंगे प्रभावित : दुर्गापुर-द्वितीय सरिया कोल ब्लॉक में 12 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई, 128 परिवारों पर विस्थापन का खतरा… फिर भी शांत है धरमजयगढ़रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वनमंडल क्षेत्र में प्रस्तावित दुर्गापुर-द्वितीय सरिया कोल ब्लॉक परियोजना अब पर्यावरण और विस्थापन दोनों दृष्टि से बड़ी चर्चा का विषय बनती जा रही है। वन विभाग से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार परियोजना के लिए लगभग 290.399 हेक्टेयर वन भूमि को गैर वानिकी उपयोग हेतु प्रस्तावित किया गया है। वहीं इस परियोजना में करीब 12,528 पेड़ों की कटाई का अनुमान भी सामने आया है।पेड़ों की संख्या के लिहाज से देखें तो यह आंकड़ा अदानी समूह की अंबुजा सीमेंट प्राइवेट लिमिटेड के लिए पुरुँगा क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला खदान की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक बताया जा रहा है। इसके बावजूद क्षेत्र में अब तक किसी बड़े विरोध प्रदर्शन या जनआंदोलन की स्थिति सामने नहीं आई है।प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी पत्र में कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड, बेंगलुरु के आवेदन पर प्रारंभिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान में किसी भी प्रकार के कार्य प्रारंभ करने की अनुमति नहीं दी गई है और परियोजना अभी केवल प्रशासनिक एवं परीक्षण चरण में है।जानकारी के अनुसार परियोजना से धरमजयगढ़, धरमजयगढ़ कॉलोनी, मेढरमार, तराईमार, बायसी कॉलोनी और बायसी सहित कुल 6 गांव प्रभावित होंगे। इन गांवों के लगभग 128 परिवारों को भविष्य में विस्थापन की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।लेकिन सबसे अधिक चर्चा जिस बात को लेकर हो रही है, वह है क्षेत्र में बना असामान्य सन्नाटा। धरमजयगढ़ क्षेत्र में पूर्व में कई परियोजनाओं को लेकर अपेक्षाकृत कम प्रभावों पर भी तीव्र विरोध प्रदर्शन देखने को मिल चुके हैं, लेकिन इस बार 12 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई और 128 परिवारों के संभावित विस्थापन के बावजूद माहौल शांत दिखाई दे रहा है।स्थानीय स्तर पर कुछ लोग इसकी एक बड़ी वजह बदलती सोच को भी मान रहे हैं। लोगों के बीच यह धारणा बनती दिखाई दे रही है कि यदि देश को बिजली चाहिए, उद्योग चाहिए और विकास चाहिए, तो उसके बदले कुछ न कुछ कीमत चुकानी ही पड़ेगी — चाहे वह जमीन हो, जंगल हो या पेड़ों की बलि। क्योंकि ऊर्जा आज देश की मूल आवश्यकता बन चुकी है और ऊर्जा के बिना बड़े विकास कार्यों की कल्पना संभव नहीं मानी जा रही।हालांकि इसके साथ ही यह सवाल भी बना हुआ है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन आखिर कैसे कायम किया जाएगा। क्या हजारों पेड़ों की कटाई और ग्रामीणों के विस्थापन के बदले प्रभावित परिवारों को पर्याप्त पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा मिल पाएगी? क्या पर्यावरणीय क्षति की भरपाई संभव हो सकेगी? आने वाले समय में यही प्रश्न इस परियोजना की दिशा और जनस्वीकृति तय कर सकते हैं।
1 min read
About The Author
1
/
495
Deeg : आदर्श आचार संहिता की अक्षरशः पालना सुनिश्चित करें राजनीतिक दल एवं अभ्यर्थी:
#chitrakoot : चित्रकूट में लगातार हो रही भारी बारिश के बाद मंदाकिनी नदी ने धारण किया विकराल रूप
Siddharthnagar : रसूलपुर में कूड़े का अंबार, दुर्गंध और बीमारी का बढ़ा खतरा
बारिश से हाहाकार! रामपुर बाघेलान में घरों में भरा पानी, घंटों से राहत का इंतजार, अधिकारी नदारद
रेलवे ओवरब्रिज निर्माण में हो रही लेट लतीफी को लेकर, 1 सितंबर को ‘रेल रोको आंदोलन’-जितेंद्र राय
Maharajganj : 'ऑपरेशन दहन' के तहत थाना पुरन्दरपुर पुलिस द्वारा 101 लीटर कच्ची शराब
Chitrakoot : नदी में बाढ़ के बीच स्फटिक शिला में श्रद्धालुओं की जान से खिलवाड़?
Anuppur : स्वतंत्रता दिवस पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले वनकर्मी सम्मानित
Rampur_baghelan : पीएम श्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चोरहटा में छात्रों का सड़क जाम
#maharajganj भारत गैस एजेंसी के सामने दोपहिया वाहन एवं डंपर की टक्कर में 04 व्यक्ति घायल
Shahdol : रामपुर गोलीकांड का मुख्य आरोपी राजकुमार शर्मा उर्फ लल्ला महाराज गिरफ्तार
Chitrakoot: हरियाली अमावस्या की रात बोलेरो चोरी… पुलिस ने खोली वारदात की परतें!
Rewa: अल्ट्राटेक बेला सीमेंट प्रबंधन के आगे प्रशासन पूरी तरह से नतमस्तक हो चुका है।
#Rampur_badhelan : विधानसभा के कांग्रेस प्रत्याशी रामशंकर पयासी ने किया कांग्रेस कार्यालय झंडारोहन
Raigarh : लैलूंगा में 17 वर्षीय नाबालिग सकुशल बरामद, आरोपी निखिल मांझी गिरफ्तार; रिमांड पर भेजा गया
1
/
495
Subscribe to my channel