धरमजयगढ़ में नागदरहा , पुसल्दा, नयाडीह कोल ब्लॉक सर्वे और बोरहोल की अनुमति का प्रस्ताव, वन भूमि पर अन्वेषण की प्रक्रिया ने पकड़ी रफ़्तार
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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में कोयला खनन और अन्वेषण की गतिविधियों ने तेजी पकड़ ली है। सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड द्वारा नागदरहा , पुसल्दा एवं नयाडीह कोल ब्लॉक के अंतर्गत वन भूमि पर सर्वे और बोरहोल करने के प्रस्ताव को पर्यावरण एवं वन स्वीकृति के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। देश की ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक योजनाओं के तहत कोयला भंडारों का विस्तृत आंकलन करने के लिए यह अन्वेषण कार्य किया जाना आवश्यक माना गया है।
इस पूरी योजना के तहत रायगढ़ एवं धरमजयगढ़ वनमंडल के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 100 बोरहोल किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके लिए लगभग 1737.548 हेक्टेयर कुल क्षेत्र में फैले कोल ब्लॉक में सर्वे की रूपरेखा तय की गई है। निर्धारित योजना के अनुसार घरघोड़ा वनपरिक्षेत्र में 57 बोरहोल और धरमजयगढ़ वनपरिक्षेत्र में 43 बोरहोल किए जाने हैं। इस कार्य से कुल 1026.672 हेक्टेयर वन भूमि और राजस्व वन भूमि प्रभावित होगी, जिसमें सीमांकित संरक्षित वन और राजस्व वनभूमि शामिल हैं।

इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को लेकर वन विभाग के अधिकारियों द्वारा क्षेत्र का भौतिक निरीक्षण किया जा चुका है। वन संरक्षक एवं वनमंडलाधिकारी द्वारा निरीक्षण के पश्चात इस गैर वानिकी प्रयोजन हेतु अपनी संस्तुति भी प्रेषित कर दी गई है। अब इस प्रस्ताव को पर्यावरण और वन स्वीकृति हासिल करने के लिए प्रोजेक्ट स्क्रीनिंग कमेटी की आगामी बैठक में विचार हेतु रखा गया है। इस उच्चस्तरीय बैठक में जिला कलेक्टर और वन विभाग के अधिकारी समेत अन्य संबंधित अधिकारी शामिल होकर इस पर अंतिम चर्चा करेंगे। वन भूमि पर बिना पूर्वक्षण के कोयला भंडार और भूतल की निरंतरता का सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं है, इसलिए इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद अब मंत्रालय से विधिवत अनुमति मिलने का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है।
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