विविध कलाओं के प्रदर्शन के साथ रामनाथ आश्रमशाला चित्रकूट में सम्पन्न हुआ 17 दिवसीय ग्रामीण बच्चों का व्यक्तित्व विकास शिविर
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शिविर में 85 ग्राम आबादियों के 220 बच्चों का हुआ एक साथ प्रदर्शन
भारत की संस्कृतिक एवं गौरवशाली विरासत की रक्षा हेतु बच्चों ने प्रस्तुत किये विविध आयाम
सहजता और सरलता से विभिन्न स्तरों के बच्चों ने एक साथ रहकर व्यक्तित्व विकास के विविध आयामों को किया आत्मसाथ

चित्रकूट- दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा विगत 25 वर्षों से चित्रकूट में प्रतिवर्ष आयोजित हो रहे व्यक्तित्व विकास शिविरों के माध्यम से ग्रामीण अंचल के बालक-बालिकाओं में मानवीय, सामाजिक और वैज्ञानिक गुणों को विकसित कर उनकी प्रतिभाओं को निखारने का अनुकरणीय कार्य किया जा रहा है। बच्चों के व्यक्तित्व का सर्वागीण विकास करने की दृष्टि से रामनाथ आश्रमशाला में दिनांक 24 अप्रैल से 10 मई 2025 तक व्यक्तित्व विकास शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के 7 जिलों एवं चित्रकूट की 50 कि0मी0 परिधि के 85 ग्राम पंचायतों से 220 बालक-बालिकाओं ( 133 बालक एवं 87 बालिकाओं) ने शिविर में सम्मिलित होकर संगीत (गायन-वादन-नृत्य), डम्बल, लेजिम, मेहंदी , रंगोली, अंग्रेजी सम्भाषण , चित्रकला, मूर्तिकला कम्प्यूटर, घोष आदि का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

शिविर का समापन दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा संचालित रामनाथ आश्रमशाला के खेल प्रांगण में बच्चों की मनमोहक कलाओं के प्रदर्शन के साथ हुआ। शिविर का उद्घाटन 24 अप्रैल को हुआ था, जिसमें कक्षा 5 से लेकर 9 तक के 10 से 15 वर्ष की आयु के बच्चे सहभागी रहे। शिविराधिकारी द्वारा शिविर आख्या का वाचन किया गया, शारीरिक प्रदर्शनों से कार्यक्रम की शुरूआत हुई। अलग-अलग समूहों में शारीरिक प्रशिक्षक राधेश्याम बाघमारे, निखिल मिश्र, वीरेंद्र प्रजापति एवं दशरथ प्रजापति के नेतृत्व में लेजिम, योगासन, डम्वल, पिरामिड, आग का गोला, मोटरसाइकिल की आकर्षक प्रस्तुतियों ने सभी को प्रभावित किया। गीत की धुन पर योगचाप का प्रदर्शन तथा विद्या, आयु, प्रज्ञा, एवं बल की बृद्धि के लिये सामूहिक सूर्य नमस्कार, पी टी के साथ कदम से कदम, ताल से ताल, स्वर से स्वर मिलाकर सभी बच्चों ने डम्बल, लेजिम का प्रदर्शन किया।

मंचीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सर्वप्रथम सरस्वती वंदना की प्रस्तुति हुई। समापन समारोह के भव्य मंच से सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भारत की विविधताओं वाली एकात्म संस्कृति का दर्शन उपस्थित जनसमुदाय ने किया। इन सभी के बीच तबला, हारमोनियम एवं ढ़ोलक वादन की प्रस्तुतियां अनोखे ढंग से हुई। भारत की प्रकृति संरक्षण, संस्कृतिक एवं राष्ट्रगौरव की रक्षा हेतु विभिन्न गीत भी बच्चों द्वारा प्रस्तुत किये गये। समापन अवसर पर शिविर के प्रशिक्षकों को अतिथियों द्वारा सम्मानित भी किया गया। मेंहदी, रंगोली एवं चित्रकला प्रशिक्षण के अन्तर्गत शिविरार्थी बच्चों द्वारा तैयार की गई सामग्री की प्रदर्शनी भी लगाई गई।
शिविराधिकारी के के बाजपेई ने कहा कि शिविर में शारीरिक एवं बौद्धिक कार्यक्रमों के साथ साथ अलग अलग प्रकार के विषयों पर व्यवहारिक प्रशिक्षण शिविरार्थियों ने अलग अलग समूहों में प्राप्त किया। शिविर के बौद्धिक सत्र में प्रतिदिन अलग अलग व्यवहारिक प्रयोगात्मक विषयों पर विषय विशेषज्ञों द्वारा ज्ञानवर्धन किया गया। रात्रिकालीन कार्यक्रम के मनोरंजन सत्र में बालक बालिकाओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली। इस दौरान विभिन्न प्रतियोगितायें भी करायी गयी।
शिविर के बौद्धिक प्रमुख जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि विभिन्न सत्रों में बौद्धिक के दौरान उन्हें शिविर की आवश्यकता-उद्देश्य और महत्व, हमारा गौरवशाली अतीत, व्यक्तित्व विकास एवं अनुशासन, चित्रकूट का पौराणिक महत्व, समाज एवं संस्कार, पुण्य भूमि भारत, जीवन में सेवा कार्य का महत्व, पर्यावरण का जीवन में महत्व एवं इसका संरक्षण व संवर्धन के साथ-साथ देश की महान विभूतियों व वीरांगनाओं के व्यक्तित्व एवं कृतित्व , स्वच्छता का जीवन मे महत्व, पंच परिवर्तन पर परिचर्चा का आयोजन सहित अन्य कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिला।
दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव श्री अभय महाजन ने प्रत्येक दिवस शिविर की व्यवस्थाओं का अनुश्रवण किया एवं बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि आप सभी लगन एवं परिश्रम से यहाँ जो भी सीख रहे हैं अपने अपने क्षेत्रों में जाकर उसे आगे बढ़ाइए।
महंत दिव्यजीवन दास दिगंबर अखाड़ा ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम की इस अलौकिक, ऊर्जावान पावन भूमि में राष्ट्रऋषि भारत रत्न नाना जी देशमुख ने भगवान राम की तरह राजसी भोग का त्याग करके ग्रामीण अंचल के विकास हेतु जो संकल्प लिया वह आज फलीभूत हो रहे हैं। ग्रीष्मावकास को हम व्यर्थ गवाँ देते थे जिसे संस्थान इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से फलीभूत कर रहा है। जिसमें बिम्ब से प्रतिबिंब, एक दीप से असंख्य दीप प्रज्ज्वलित करने का कार्य कर रहा है। ग्रामीण बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं सहजीवन का यह प्रयास अनुकरणीय है।
श्री गिरीष अग्निहोत्री जिला शिक्षाधिकारी सतना ने कहा कि ऐसे शिविरों का आयोजन आज की महती आवश्यकता हो गई है क्योंकि जीवन की आपाधापी में ज्ञान तो अधिक प्राप्त हो रहा है किंतु व्यक्तित्व का विकास नही हो पा रहा है क्योंकि पहले विद्यालय ज्ञानार्जन के लिए और संयुक्त परिवार व्यक्तित्व विकास के लिए होते थे किंतु अब संयुक्त परिवार विलुप्त होते जा रहे हैं आप सबने यहाँ जो अल्पावधि में सीखा है वह जीवन के लिए अमूल्य हैं इसे अपने जीवन में आत्मसात करने के साथ साथ यह संकल्प ले कि इसे अपने साथियों को भी प्रदान करेंगे क्योंकि चरित्र निर्माण आज की महती आवश्यकता है। प्रो भरत मिश्रा पूर्व कुलगुरु महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय ने कहा कि हमारा व्यक्तित्व एवम कृतित्व ही हमारी पहचान है विशाल ह्रदय वाले बनें, हमारे जीवन मे असीम संभावनाएं हैं ऐसे सुअवसर बार बार नही मिलते यह शिविर आप सभी के जीवन की दिशा और दशा सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है।
शिविर संयोजक राजेन्द्र सिंह ने बताया कि दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा ग्रामीण बच्चों के समग्र व्यक्तित्व विकास शिविर की शुरुआत श्रद्धेय नानाजी के मार्गदर्शन में वर्ष 2001 से हुई थी। तब से चित्रकूट में सभी शैक्षणिक प्रकल्पों के साथ मिलकर प्रतिवर्ष 10 से 20 दिनों का व्यक्तित्व विकास शिविर का आयोजन हो रहा है। इस वर्ष के शिविर में उ0प्र0 तथा म0प्र0 के 7 जिलों की 85 ग्राम आबादियों से 220 ग्रामीण बच्चों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए गंगाराम यादव ने कहा कि विभिन्न ग्रामों, नगरों और विभिन्न सामाजिक आर्थिक स्तरों के बच्चों ने एक साथ रहकर सहजीवन का अभ्यास किया। शिविरार्थियों ने व्यक्तित्व विकास के विविध आयामों को हंसते-खेलते सहजता और सरलता से सीखा समझा है। समापन के उपरांत दीक्षांत सत्र में शिविरार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। इस सत्र में शिविरार्थियों ने अच्छा नागरिक बनने के लिये पंच परिवर्तनों को अपनाने की शपथ ली।

शिविर में अन्य प्रशिक्षकों के रूप में संगीत प्रशिक्षक के रूप में डॉ रामराज पाण्डेय, डॉ दादूराम श्रीवास, सुश्री सुधा सिंह, संजू सिंह, सियाशरण तिवारी, कला प्रशिक्षण, संजीव घाटी, रविनन्दन दुबे, कंप्यूटर में छोटेलाल राणा, सतीश कुमार, मेहंदी रंगोली गौरी कुशवाहा, रूबी विश्वकर्मा, अंग्रेजी सम्भाषण, रामवीर सक्सेना, राजेन्द्र श्रीवास, गोमय कला सुरेश राठौर, मूर्तिकला लालमन प्रजापति, डॉ राकेश मौर्य, डॉ अशोक पाण्डेय, इं राजेश त्रिपाठी, जितेंद्र सिंह, सत्यराम यादव एवं अन्य सभी कार्यकर्ताओं ने अपना अमूल्य योगदान प्रदान किया। बच्चों द्वारा शिविर के दौरान प्राप्त हुए अपने खट्टे मीठे अनुभव प्रस्तुत किये।
शिविर का समापन कार्यक्रम में मध्यप्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, सतना सांसद गणेश सिंह, विधायक चित्रकूट सुरेंद्र सिंह गहरवार, अध्यक्ष चित्रकूट विकास प्राधिकरण विजयपाल यादव, विपिन विराट महाराज कामतानाथ आरती स्थल, अमित कुमार बरहा हनुमान जी,भास्कर दास जी महाराज, महापौर सतना योगेश ताम्रकार, अध्यक्ष नगर पंचायत चित्रकूट सुश्री साधना पटेल, अध्यक्ष डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक बाँदा- चित्रकूट पंकज अग्रवाल, पूर्व मंत्री उ प्र शासन चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, पूर्व सांसद बाँदा- चित्रकूट भैरव प्रसाद मिश्र, सामाजिक कार्यकर्ता भगवती प्रसाद पाण्डेय, चंद्र प्रकाश खरे, श्याम सुंदर मिश्रा, अतुल प्रताप सिंह, विज्ञान चंद्र विश्वकर्मा, राजेंद्र द्विवेदी, देवदत्त त्रिपाठी, गुलाब शुक्ल, श्री गोपाल भाई समाजसेवी, विवेक अग्रवाल, रूपा अग्रवाल समाजसेवी सहित दीनदयाल शोध संस्थान के महाप्रबंधक डॉ अनिल जायसवाल, डॉ राजेन्द्र सिंह नेगी, डॉ नवीन शर्मा, जितेंद्र श्रीवास्तव, मनोज सैनी, अनिल कुमार सिंह, डॉ वरुण गुप्ता, हरिराम सोनी, कमलेश जी सहित समस्त प्रकल्पों के प्रमुख कार्यकर्ता, मातृशक्ति एवं गणमान्य नागरिक व अभिभावक उपस्थित रहे।

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