May 15, 2026

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भारतमाला प्रोजेक्ट में सैकड़ों बेशकीमती पेड़ गायब! सड़क निर्माण के नाम पर वन भूमि में मनमानी के आरोप

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रायगढ़ जिले में भारतमाला सड़क परियोजना एक बार फिर गंभीर विवादों में घिरती नजर आ रही है। मुआवजा वितरण में गड़बड़ी, कोल ब्लॉक क्षेत्र की जमीन के अधिग्रहण और अमृत सरोवर योजना के तालाब से मिट्टी उत्खनन जैसे मामलों के बाद अब धरमजयगढ़ वन मंडल क्षेत्र में वन भूमि और पेड़ों के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान तय सीमा से अधिक वन भूमि पर खुदाई कर सैकड़ों बेशकीमती पेड़ों को जड़ से उखाड़ दिया गया और बाद में वे रहस्यमयी तरीके से गायब हो गए।


धरमजयगढ़ क्षेत्र के सिसरिंगा घाट इलाके में चल रहे भारतमाला सड़क निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए जितनी भूमि स्वीकृत थी, उससे कहीं अधिक क्षेत्र में मशीनें चलाकर खुदाई की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में सागौन सहित कई मूल्यवान पेड़ों को उखाड़ कर फेंक दिया गया। कुछ ही दिनों बाद वे पेड़ मौके से गायब भी हो गए। ग्रामीणों का दावा है कि घटनास्थल पर आज भी पेड़ों के टूटे हुए हिस्से और अवशेष पड़े हुए हैं, लेकिन समूल उखाड़े गए पेड़ों का कोई रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं है।


स्थानीय निवासियों के अनुसार सड़क निर्माण की आड़ में वन क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य अधिग्रहित भूमि से बाहर तक फैल गया, जिससे सरकारी जल स्रोतों सहित निजी और सार्वजनिक संपत्तियों को भी क्षति पहुंची है। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पर्यटन स्थल के रूप में पहचाने जाने वाले सिसरिंगा घाट क्षेत्र में बिना पर्याप्त निगरानी के तेजी से कार्य किया गया।


मामले में कंपनी प्रबंधन से जुड़े प्रदीप सिंह ने जानकारी होने से इनकार किया है। वहीं वन विभाग के अधिकारियों के बयान इस पूरे मामले को और उलझा रहे हैं। धरमजयगढ़ रेंजर डी.पी. सोनवानी ने कहा कि भारतमाला परियोजना के लिए चिन्हांकित पेड़ों की कटाई विभागीय प्रक्रिया के तहत की गई थी। दूसरी ओर उत्पादन इकाई के रेंजर जॉन तिग्गा ने बताया कि परियोजना से संबंधित पेड़ों की कटाई वर्षों पहले ही पूरी हो चुकी थी और हाल के समय में विभाग द्वारा किसी नई कटाई की कार्रवाई नहीं की गई।
वन विभाग के अधिकारियों के विरोधाभासी बयानों ने अब कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि हाल में किसी पेड़ की वैधानिक कटाई नहीं हुई, तो फिर निर्माण क्षेत्र से बड़ी संख्या में पेड़ आखिर गायब कैसे हो गए। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और सड़क निर्माण के नाम पर वन भूमि में हुए कथित अतिक्रमण तथा पेड़ों के नुकसान की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

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