बाबा साहेब के आदर्शों पर चलकर ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव : कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे
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चित्रकूट- 14 अप्रैल 2026 आज महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में भारत के संविधान निर्माता, भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती श्रद्धा एवं उल्लास के साथ समारोहपूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन गरिमामय वातावरण में किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय परिवार की सक्रिय भागीदारी रही।कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने की।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने बाबा साहेब के अमर संदेश “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” की विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा कि यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त सूत्र है। उन्होंने कहा कि यदि युवा वर्ग इस संदेश को अपने जीवन में आत्मसात कर ले, तो न केवल व्यक्तिगत विकास संभव है, बल्कि राष्ट्र भी प्रगति के पथ पर तेजी से अग्रसर होगा।
कुलगुरु प्रो. चौबे ने बाबा साहेब के जीवन दर्शन को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और सामाजिक विषमताओं के विरुद्ध संघर्ष करते हुए समानता एवं न्याय की स्थापना के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने कभी व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता नहीं दी, बल्कि उनका प्रत्येक कार्य राष्ट्र और समाज के कल्याण के लिए समर्पित रहा। आज आवश्यकता है कि हम उनके आदर्शों को व्यवहार में उतारते हुए एक समतामूलक समाज के निर्माण में अपनी भूमिका सुनिश्चित करें।

मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राजनीति विज्ञान के वरिष्ठ प्राध्यापक एवं ग्रामीण विकास एवं व्यवसाय प्रबंधन संकाय के अधिष्ठाता प्रो. अमर जीत सिंह ने अपने विस्तृत उद्बोधन में कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में निहित समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के सिद्धांत आधुनिक लोकतंत्र की आधारशिला हैं।

प्रो. सिंह ने कहा कि बाबा साहेब ने सामाजिक न्याय को केवल सिद्धांत के रूप में नहीं, बल्कि व्यवहारिक रूप में स्थापित किया। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बताया और वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे संविधान के मूल्यों को समझें और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनें।
विशिष्ट अतिथि के रूप में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. कपिल देव मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि बाबा साहेब का जीवन संघर्ष, आत्मबल और संकल्प का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज के परिप्रेक्ष्य में सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए उनके विचारों को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने की आवश्यकता है।
कुलसचिव एवं अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के अधिष्ठाता प्रो. आञ्जनेय पांडेय ने कहा कि बाबा साहेब ने समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर दिलाने के लिए जो प्रयास किए, वे सदैव स्मरणीय रहेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा और तकनीकी ज्ञान के माध्यम से ही समाज को सशक्त बनाया जा सकता है।
राजनीति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. नीलम चौरे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बाबा साहेब का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है। उन्होंने कहा कि हमें उनके विचारों को केवल पढ़ने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने आचरण में भी उतारना चाहिए। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन भी प्रो. चौरे द्वारा किया गया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे के नेतृत्व में डॉ. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके राष्ट्रनिर्माण में योगदान को प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय बताया।
कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन प्रो. आञ्जनेय पांडेय द्वारा किया गया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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