वन भूमि पर खुदाई का मामला !कार्रवाई पर सस्पेंस ? कई सवालों के जवाब बाकी !
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धरमजयगढ़ वन मण्डल के बाकारुमा परिक्षेत्र में प्रस्तावित 7.5 मेगावाट जल विद्युत परियोजना से जुड़ा मामला अब केवल नियम उल्लंघन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आधिकारिक अभिलेखों में यह स्पष्ट हो चुका है कि राजस्व वन भूमि पर बिना अनुमति खुदाई का कार्य किया गया, जिसे वन संरक्षण अधिनियम, 1980 का उल्लंघन माना गया है।
दस्तावेजों के अनुसार, खसरा क्रमांक 347 और 365 की भूमि पर फरवरी 2024 में खुदाई कार्य किया गया। इस उल्लंघन को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए फरवरी 2024 और अप्रैल 2024 को कलेक्टर रायगढ़ को पत्र भी लिखा गया। साथ ही यह भी उल्लेख है कि उल्लंघन से संबंधित कार्य फिलहाल बंद कर दिया गया है यानि पत्र जारी होने के बाद जाँच के दौरान काम बंद कर दिया गया था , जाँच समिति गठित हुईं , जाँच अधिकारी बनाये गये लेकिन किसे यह भी अपने आप मे एक अहम् सवाल है , जाँच पूरी हुईं और………………
लेकिन यहीं से कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े होते हैं ,
क्या कलेक्टर स्तर पर इन पत्रों पर कोई ठोस कार्रवाई की गई?
क्या दोषी अधिकारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कोई दंडात्मक कदम उठाया गया या मामला अब भी विचाराधीन है?
इस पूरे प्रकरण में वास्तविक दोषी किसे माना गया—कंपनी, स्थानीय अधिकारी या कोई और ?
क्या जिम्मेदार व्यक्तियों को नोटिस, निलंबन या अन्य कोई कार्रवाई का सामना करना पड़ा?
और सबसे अहम सवाल—क्या जमीनी स्तर पर आज भी कार्य पूरी तरह बंद है, या फिर किसी रूप में गतिविधियां जारी हैं?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब अब तक सामने नहीं आ सका है, जिससे पूरे मामले में पारदर्शिता को लेकर संदेह गहराता जा रहा है। पहले से ही बिना अंतिम वन स्वीकृति के ट्रांसमिशन लाइन निर्माण के आरोपों के बीच अब उल्लंघन की पुष्टि और कार्रवाई की स्थिति अस्पष्ट होना, प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
स्थानीय लोगों और पर्यावरण से जुड़े नागरिकों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में समयबद्ध और पारदर्शी कार्रवाई नहीं होती, तो यह कानूनों की गंभीरता को कमजोर करता है और भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं को बढ़ावा दे सकता है।
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