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गौ-सेवा से बदल रही तस्वीर

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आशुतोष द्विवेदी सेवा संस्थान के प्रकल्प अंतर्गत सरभंग मुनि आश्रम के समीप “आशुतोष गौ अभयारण्य” का भूमि पूजन हाल ही में गुलाब शुक्ला के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में अपने परिवार सहित उपस्थित रहते हुए उन्होंने केवल औपचारिकता नहीं निभाई, बल्कि मौके पर पानी की गंभीर समस्या को देखते हुए तुरंत बोरिंग मशीन बुलवाकर जल व्यवस्था सुनिश्चित कराई।

इसके साथ ही उन्होंने:

₹21,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की

भविष्य में टीन शेड निर्माण का आश्वासन दिया

“श्री शुक्ला अब इस गौ-अभयारण्य के संरक्षक के रूप में हमारा मार्गदर्शन करेंगे।”
— आशुतोष द्विवेदी

धार्मिक विरासत के संरक्षण में अग्रणी

गुलाब शुक्ला की सेवा भावना केवल गौ-शाला तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने कई धार्मिक स्थलों के संरक्षण का भी बीड़ा उठाया है:

🔹 पवरिया बाबा (मझगवां)

यहाँ पानी की समस्या को दूर करने के लिए उन्होंने बोरिंग कार्य संपन्न कराया।

🔹 मुड़िया देव (जवारिन)

खंडित देवी प्रतिमा की जानकारी मिलते ही:

मूर्ति पुनःस्थापना का संकल्प लिया
मंदिर के संपूर्ण जीर्णोद्धार का जिम्मा उठाया
🔹 रीमारी

यादव समाज की वर्षों पुरानी मंदिर व चबूतरा निर्माण की समस्या को हल कर सामाजिक एकता का उदाहरण प्रस्तुत किया।

एक विजनरी और जनसेवक

व्यवसायिक रूप से महाराष्ट्र के बड़े उद्योगपतियों में शामिल होने के बावजूद, गुलाब शुक्ला अपनी जड़ों और समाजसेवा से जुड़े हुए हैं।

आज स्थानीय लोगों के बीच उनकी पहचान केवल एक उद्योगपति की नहीं, बल्कि एक सच्चे “जनसेवक” के रूप में स्थापित हो चुकी है।

निष्कर्ष:
गुलाब शुक्ला का जीवन यह संदेश देता है कि सच्ची सफलता वही है, जो समाज के काम आए।

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