धरमजयगढ़ के प्रेमनगर कॉलोनी में दिखा दुर्लभ एलबिनो पिंक सैंड बोआ”
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धरमजयगढ़ के प्रेमनगर कॉलोनी क्षेत्र में उस समय लोगों की आंखें आश्चर्य से फैल गईं, जब एक बेहद दुर्लभ और आकर्षक एलबिनो पिंक सैंड बोआ दिखाई दिया। यह दृश्य न केवल स्थानीय निवासियों के लिए कौतूहल का विषय बना, बल्कि वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों के लिए भी एक अनमोल घटना साबित हुआ।

इस दुर्लभ सांप की पुष्टि धरमजयगढ़ वन विभाग एवं Nova Nature Welfare Society की टीम द्वारा की गई। विशेषज्ञों के अनुसार यह सांप Albinism नामक अत्यंत दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति का उदाहरण है, जिसमें शरीर में Melanin का निर्माण न के बराबर होता है। इसी वजह से इसका रंग सामान्य सैंड बोआ से अलग हल्का गुलाबी, सफेद या पीला दिखाई देता है, जबकि आंखों में लालिमा इसकी विशिष्ट पहचान होती है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि एलबिनो सैंड बोआ का दिखना अत्यंत दुर्लभ घटना है। छत्तीसगढ़ में इससे पहले दुर्ग, रायपुर और राजनांदगांव जिलों में भी ऐसे दुर्लभ प्रजाति के सांप मिलने की पुष्टि हो चुकी है। देश के अन्य हिस्सों में भी इस तरह की घटनाएं विरले ही सामने आती हैं।
उल्लेखनीय है कि Nova Nature Welfare Society की टीम पहले भी कई दुर्लभ रेस्क्यू अभियानों के लिए चर्चा में रही है। खासकर रायपुर में दो सिर वाले सैंड बोआ का सफल रेस्क्यू, वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक अनूठी उपलब्धि मानी जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार सैंड बोआ पूरी तरह विषहीन होता है और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कृन्तकों की संख्या नियंत्रित कर अप्रत्यक्ष रूप से किसानों के लिए भी लाभकारी साबित होता है।
वन विभाग एवं Nova Nature Welfare Society ने आमजन से अपील की है कि यदि इस प्रकार के दुर्लभ वन्यजीव कहीं भी दिखाई दें, तो घबराएं नहीं और न ही उन्हें नुकसान पहुंचाएं। तुरंत संबंधित विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें, ताकि सुरक्षित संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि प्रकृति अपने भीतर अनगिनत रहस्य और चमत्कार समेटे हुए है—बस जरूरत है उन्हें समझने और सुरक्षित रखने की।
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