ए.के.एस. यूनिवर्सिटी के बायोटेक विद्यार्थियों का सूक्ष्मजीवी बायोडीज़ल पर उल्लेखनीय प्रदर्शन।
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भोपाल। ए.के.एस. यूनिवर्सिटी, सतना के बी.टेक जैव प्रौद्योगिकी के विद्यार्थियों — हिमांशु पांडेय,श्रद्धा मंघनानी एवं शिवम विश्वकर्मा — ने जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद समर्थित ‘ई-युवा’ तृतीय राष्ट्रीय आह्वान के अंतिम चयन चरण में अपने अनुसंधान-आधारित नवाचार का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया। यह कार्य डॉ. अश्विनी ए.बाऊ (विभागाध्यक्ष, जैव प्रौद्योगिकी) के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। भोपाल स्थित कैरियर कॉलेज में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवा शोधकर्ताओं में नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करना है। इस पहल के अंतर्गत नवाचार कर्ताओं को मार्गदर्शन, संवर्धन एवं वित्तीय सहयोग प्रदान किया जाता है।
विद्यार्थियों ने ‘एक कोशिकीय तेल’ आधारित बायो डीज़ल उत्पादन की अवधारणा प्रस्तुत की, जिसमें सूक्ष्मजीवी लिपिड जैव संश्लेषण के माध्यम से नवीकरणीय ईंधन के विकास की संभावनाओं को रेखांकित किया गया। यह तकनीक जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम करने तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों की निर्णायक समिति ने परियोजनाओं का मूल्यांकन तकनीकी व्यवहार्यता, नवाचार स्तर एवं सामाजिक-पर्यावरणीय प्रभाव के आधार पर किया तथा ए.के.एस. के विद्यार्थियों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण की सराहना की। कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को वैज्ञानिकों एवं औद्योगिक विशेषज्ञों के साथ संवाद का अवसर भी प्रदान किया, जिससे प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक रूपांतरण एवं उद्यम स्थापना की समझ विकसित हुई।
यह सहभागिता ए.के.एस. यूनिवर्सिटी की अनुसंधान उत्कृष्टता, वैज्ञानिक नवाचार एवं उद्यमशीलता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।इस उपलब्धि पर डीन कमलेश चौरे, कुलपति प्रो. बी.ए. चोपड़े एवं प्रो-चांसलर इं. अनंत कुमार सोनी ने विद्यार्थियों — हिमांशु पांडेय, श्रद्धा मंघनानी, शिवम विश्वकर्मा — तथा मार्गदर्शक डॉ. अश्विनी ए.बाऊ को शुभकामनाएं दीं।
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