ए.के.एस. विश्वविद्यालय में सतना का पहला रबी मक्का पर उन्नत वैज्ञानिक शोध
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सतना।कृषि नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ए.के.एस. विश्वविद्यालय, सतना के कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय ने रबी मक्का उत्पादन तकनीकों पर उन्नत शोध किया है। जिले में पहली बार रबी मौसम में मक्का की संकर किस्म पर इस प्रकार का वैज्ञानिक प्रयोग किया गया है।
विश्वविद्यालय के अनुसंधान फार्म में रैंडमाइज्ड ब्लॉक डिज़ाइन पद्धति के तहत यह अध्ययन किया गया। प्रयोग में उन्नत संकर किस्म अद्वंत-741 का उपयोग किया गया, जो कम सिंचाई में भी बेहतर उत्पादन देने की क्षमता रखती है।
विशेषज्ञों के अनुसार रबी मक्का की खेती अब तक मुख्य रूप से बिहार में बड़े स्तर पर होती रही है, लेकिन सतना में इसके सफल परीक्षण से यह स्पष्ट हुआ है कि मध्यप्रदेश के किसान भी इसे लाभकारी फसल के रूप में अपना सकते हैं।
अध्ययन में एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) पर जोर दिया गया, जिसमें रासायनिक उर्वरकों के साथ गोबर की खाद, वर्मीकम्पोस्ट और जीवामृत जैसे जैविक स्रोतों का उपयोग किया गया। इसका उद्देश्य फसल वृद्धि, उत्पादन और मिट्टी की उर्वरता पर इनके प्रभाव का आकलन करना था।
इस शोध का मार्गदर्शन सहायक प्राध्यापक संजय लिल्हारे ने किया, जबकि एम.एससी. एग्रोनॉमी के छात्रों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। अध्ययन के दौरान पौध ऊँचाई, पत्ती क्षेत्र, भुट्टों की संख्या, दानों की संख्या और कुल उपज जैसे विभिन्न मानकों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया।
कृषि संकाय के डीन डॉ. ए.के. भौमिक ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयोग किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. डी.पी. चतुर्वेदी ने छात्रों से अनुसंधान में सक्रिय भूमिका निभाने और किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुँचाने का आह्वान किया।
संजय लिल्हारे ने बताया कि रबी मक्का की यह संकर किस्म कम पानी में भी सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है, जिससे जल संरक्षण के साथ बेहतर उत्पादन संभव है। यह शोध क्षेत्र के किसानों के लिए नई संभावनाएँ खोलने वाला सिद्ध हो सकता है।
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