धान खरीदी में बड़ा खेल! बिचौलियों की चालाकी? आदिवासियों की जमीन पर एग्रीस्टैक पंजीयन कर प्रशासन की आँखों में झोंकी धूल !
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धरमजयगढ़ – धरमजयगढ़ क्षेत्र की धान खरीदी व्यवस्था में सामने आए ताज़ा खुलासों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह महज़ अनियमितता नहीं, बल्कि बिचौलियों की सुनियोजित चालाकी का नतीजा है। आरोप है कि रेलवे परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीनों से लेकर आदिवासी भू-स्वामियों की जमीन तक, दूसरों के नाम से एग्रीस्टैक पंजीयन कर धान की खरीदी कर ली गई, और यह पूरा खेल लंबे समय तक प्रशासन की आँखों में धूल झोंकते हुए चलता रहा।
सूत्रों के मुताबिक, बिचौलियों ने फर्जी दस्तावेज, पुराने भूमि अभिलेख और तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर ऐसा जाल बिछाया कि असली जमीन मालिकों को भनक तक नहीं लगी और उनके नाम या जमीन के आधार पर धान की बिक्री हो गई।
सबसे अहम बात यह है कि प्रशासन द्वारा लगातार सतत निगरानी और पारदर्शी निरीक्षण के दावे किए जाते रहे, लेकिन बिचौलियों की इस चालाकी के आगे ये दावे नाकाफी साबित हुए आखिर इतने बड़े स्तर पर इस खेल को आखिर कैसे अंजाम दिया गया , अब तक सामने आए मामले केवल इशारा भर माने जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि ऐसे और भी कई मामले सामने आ सकते हैं, जो अभी उजागर नहीं हुए हैं। यदि जांच गहराई से की गई, तो यह मामला और भी बड़े खुलासों का कारण बन सकता है।
फिलहाल पूरे क्षेत्र की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। उम्मीद है कि जांच पूरी होने के साथ ही सच्चाई सामने आएगी और यह स्पष्ट होगा कि बिचौलियों के इस खेल में कौन-कौन शामिल था और किस स्तर तक जिम्मेदारी तय होगी।
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