सूचना के अधिकार पर पहरा या रिकॉर्ड व्यवस्था बेहाल ? करोड़ों के टेंडरों के बीच बड़ा सवाल !
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धरमजयगढ़ – नगर पंचायत धरमजयगढ़ में एक ओर करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के लिए निविदाएं निकल रही हैं और दूसरी ओर सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी आवेदकों तक पहुंचने में ही अटकती नजर आ रही है। कहीं जानकारी समय पर नहीं मिल रही, तो कहीं निर्धारित शुल्क जमा कराने के बाद भी सूचना उपलब्ध नहीं कराए जाने की शिकायत सामने आ रही है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नगर पंचायत में रिकॉर्ड व्यवस्था कमजोर है या फिर कुछ जानकारियां सार्वजनिक होने से रोकने की कोशिश हो रही है?
मामला केवल आरटीआई आवेदन तक सीमित नहीं है। सूचना का अधिकार सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में यदि आवेदक को आवेदन करने, शुल्क जमा करने और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी जानकारी के लिए अपील का दरवाजा खटखटाना पड़े, तो नगर पंचायत की सूचना व्यवस्था और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

और यह स्थिति उस समय सामने आ रही है जब नगर पंचायत धरमजयगढ़ में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का बड़ा दौर शुरू होने वाला है। गौरव पथ, नेहरू उद्यान का जीर्णोद्धार, विभिन्न वार्डों में सीसी सड़क एवं नाली निर्माण तथा कई वार्डों में पाइप लाइन विस्तार, स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स निर्माण और मुक्तिधाम निर्माण जैसे कार्यों पर बड़ी धनराशि खर्च की जानी है। जाहिर है, अब इन कार्यों में केवल टेंडर खुलना ही महत्वपूर्ण नहीं होगा, बल्कि टेंडर से लेकर अंतिम भुगतान तक पूरा हिसाब सार्वजनिक निगरानी के दायरे में होना चाहिए।

नगर के कुछ विकास कार्यों का ठेका स्थानीय स्तर के चुनिंदा ठेकेदारों के साथ-साथ नगरीय क्षेत्र से बाहर के ठेकेदारों को दिए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में निर्माण कार्य शुरू होते ही जनता की नजर ठेकेदार पर ही नहीं, बल्कि नगर पंचायत की निगरानी व्यवस्था पर भी रहेगी। आखिर सड़क की मोटाई कितनी रखी गई, नाली में कितना काम हुआ, पाइप लाइन कितनी बिछी, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता क्या रही, माप पुस्तिका में क्या दर्ज हुआ और भुगतान किस आधार पर हुआ—इन सभी सवालों का जवाब दस्तावेजों और धरातल दोनों पर मिलना चाहिए।

आरटीआई में सूचना देने में यदि लगातार देरी होती है या जानकारी उपलब्ध कराने के लिए आवेदक को बार-बार अपील करनी पड़ती है, तो यह स्थिति आने वाले करोड़ों के विकास कार्यों के लिए भी एक गंभीर संकेत जरूर है।

अब नगर पंचायत के विकास कार्यों की पड़ताल केवल घोषणा और टेंडर तक सीमित नहीं रहेगी। निविदा में क्या लिखा था और जमीन पर क्या बना, स्वीकृत राशि कितनी थी और खर्च कितना हुआ, माप पुस्तिका में क्या दर्ज है और निर्माण की वास्तविक स्थिति क्या है—इन तमाम बिंदुओं को सामने लाया जाएगा।

क्योंकि मामला सिर्फ एक सड़क, एक नाली या एक उद्यान का नहीं है। मामला जनता के पैसे, सरकारी रिकॉर्ड और सार्वजनिक जवाबदेही का है।
अब देखना यह है कि आने वाले करोड़ों के काम नगर की तस्वीर बदलते हैं या नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों को और गहरा करते हैं। टेंडर खुल चुके हैं, या खुलने वाले हैं अब निगाहें काम शुरू होने पर रहेंगी।

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