भारत माला-130ए में मुआवजे का गणित उलझा ! पुरानी दरों पर भू-स्वामियों ने जताई आपत्ति
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भू-स्वामियों ने नई प्रभावशील गाइडलाइन दरों पर पुनर्विचार की मांग उठाई

धरमजयगढ़ – राष्ट्रीय राजमार्ग भारत माला परियोजना-130ए के तहत किमी 114.410 से किमी 121.450 तक लगभग 7.04 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए की जा रही निजी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में मुआवजा निर्धारण का मुद्दा तूल पकड़ता नजर आ रहा है। प्रभावित भू-स्वामियों ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सह भू-अर्जन अधिकारी, धरमजयगढ़ के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत कर मुआवजा निर्धारण की दर और आधार तिथि पर पुनर्विचार की मांग की है। भू-स्वामियों का कहना है कि उनकी भूमि के बाजार मूल्य एवं प्रतिकर की गणना पुरानी कलेक्टर गाइडलाइन दरों के आधार पर की जा रही है, जबकि उनके अनुसार रायगढ़ जिले में 20 फरवरी 2026 से पुनरीक्षित कलेक्टर गाइडलाइन दरें प्रभावशील हो चुकी थीं।

भू-स्वामियों ने अपने अभ्यावेदन में यह भी कहा है कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत प्रारंभिक अधिसूचना भारत के राजपत्र में 17 फरवरी 2026 को प्रकाशित हुई थी, जबकि स्थानीय समाचार पत्रों में इसका प्रकाशन 21 फरवरी 2026 को हुआ। इसी आधार पर उनका तर्क है कि बाजार मूल्य निर्धारण के संदर्भ में 21 फरवरी 2026 की स्थिति और उस समय प्रभावशील दरों पर भी विचार किया जाना चाहिए।

21 फरवरी की तारीख पर टिका विवाद
मामले का महत्वपूर्ण पहलू अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख को लेकर भू-स्वामियों द्वारा उठाया गया तर्क है। अभ्यावेदन के अनुसार 17 फरवरी को राजपत्र में प्रकाशन के बाद 21 फरवरी को समाचार पत्रों में प्रकाशन हुआ और इसी बीच 20 फरवरी से जिले में नई कलेक्टर गाइडलाइन प्रभावशील हो चुकी थी। भू-स्वामियों ने इसी घटनाक्रम का हवाला देते हुए नई दरों के आधार पर मुआवजा निर्धारण पर पुनर्विचार का आग्रह किया है।
हालांकि, 21 फरवरी 2026 को बाजार मूल्य निर्धारण की निर्णायक आधार तिथि माना जाएगा या नहीं, यह संबंधित वैधानिक प्रावधानों, अधिसूचनाओं और अधिग्रहण अभिलेखों की व्याख्या पर निर्भर करेगा। इस संबंध में भू-स्वामियों का तर्क अपने आप में अंतिम कानूनी निष्कर्ष नहीं है।

प्रत्येक खसरे की पूरी गणना मांग रहे भू-स्वामी
भू-स्वामियों ने केवल दर बदलने की मांग ही नहीं की है, बल्कि मुआवजा निर्धारण की पूरी गणना सार्वजनिक करने का आग्रह किया है। उनके अनुसार प्रत्येक खसरा नंबर के लिए अधिग्रहित रकबा, बाजार मूल्य के लिए अपनाई गई दर, गुणन कारक, प्रतिकर राशि, सोलैटियम, ब्याज तथा अन्य देय लाभों की अलग-अलग गणना उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि विस्तृत गणना पत्रक मिलने के बाद ही वे यह स्पष्ट रूप से देख सकेंगे कि उनकी भूमि के मुआवजे का निर्धारण किस आधार पर किया गया है।
8 सितंबर के नोटिस को लेकर भी आपत्ति
भू-स्वामियों ने 8 सितंबर 2026 को जारी नोटिस के संबंध में भी आपत्ति जताई है। अभ्यावेदन में कहा गया है कि नोटिस में प्रत्येक खातेदार की भूमि का खसरा नंबर, अधिग्रहित रकबा, लागू बाजार दर और प्रतिकर की विस्तृत गणना पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने विस्तृत गणना पत्रक उपलब्ध कराने तथा उस पर आपत्ति प्रस्तुत करने और सुनवाई का अवसर दिए जाने का अनुरोध किया है।
भूमि अधिग्रहण कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला
अपने पक्ष के समर्थन में भू-स्वामियों ने 2013 के उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता से संबंधित भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 26, धारा 30 तथा प्रथम अनुसूची का उल्लेख किया है। इसके अलावा Union of India बनाम Tarsem Singh, (2019) 9 SCC 304 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का भी हवाला दिया गया है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इन प्रावधानों और न्यायालयीन निर्णयों की मामले पर प्रयोज्यता तथा उनके आधार पर देय लाभों का अंतिम निर्धारण सक्षम प्राधिकारी अथवा न्यायालय द्वारा संबंधित तथ्यों और लागू कानून के अनुसार किया जाना है। अभ्यावेदन में किया गया उल्लेख भू-स्वामियों द्वारा अपने पक्ष में प्रस्तुत कानूनी आधार के रूप में देखा जाना चाहिए।
विकास गतिविधियों का हवाला देकर बाजार मूल्य पर पुनर्विचार की मांग
भू-स्वामियों ने संबंधित भूमि की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा है कि अधिग्रहित क्षेत्र धरमजयगढ़ नगरीय क्षेत्र, राष्ट्रीय राजमार्ग तथा प्रस्तावित कोयला और अन्य विकास गतिविधियों के आसपास स्थित है। उनके अनुसार इन परिस्थितियों का भूमि के वर्तमान एवं संभावित बाजार मूल्य पर प्रभाव पड़ सकता है और इसलिए मूल्यांकन करते समय उपलब्ध वैधानिक मानकों के अनुसार इन पहलुओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।
अंतिम अवार्ड से पहले पूरी प्रक्रिया की समीक्षा का आग्रह
भू-स्वामियों ने मांग की है कि अंतिम अवार्ड पारित करने से पहले मुआवजा निर्धारण की आधार तिथि, लागू कलेक्टर गाइडलाइन, भूमि का बाजार मूल्य और प्रतिकर की गणना की पुनः समीक्षा की जाए। साथ ही प्रत्येक खसरा नंबर का विस्तृत गणना पत्रक उपलब्ध कराकर प्रभावित भू-स्वामियों को व्यक्तिगत सुनवाई और आपत्ति प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाए।
अभ्यावेदन में मद्रास उच्च न्यायालय के National Highways Authority of India बनाम S. Rudra Devi, W.A. (MD) Nos. 273 एवं 274 of 2026, दिनांक 6 मार्च 2026 के आदेश सहित अन्य दस्तावेज संलग्न किए जाने का भी उल्लेख है।
फिलहाल इस पूरे मामले में निर्णायक बिंदु यही है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया में बाजार मूल्य निर्धारण के लिए कौन-सी तारीख और कौन-सी दर लागू मानी जाती है तथा भू-स्वामियों द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर भू-अर्जन प्राधिकारी क्या निर्णय लेता है। भू-स्वामियों ने नई प्रभावशील गाइडलाइन के आधार पर मुआवजा निर्धारण की मांग रखी है, जबकि इस मांग की वैधानिक स्वीकार्यता का अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा अभिलेखों और लागू प्रावधानों के आधार पर किया जाना है।
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