धरमजयगढ़ में आदिवासी भूमि के कथित अवैध नामांतरण का मामला: एसडीएम से जांच और कार्रवाई की मांग
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धरमजयगढ़ – छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ तहसील से आदिवासी समुदाय की भूमि को गैर-आदिवासी के नाम पर अवैध रूप से नामांतरित करने का कथित रुप से एक गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), धर्मजयगढ़ को एक औपचारिक आवेदन सौंपकर त्वरित जांच और उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
क्या है पूरा मामला ?

आवेदन में दी गई जानकारी के अनुसार, धर्मजयगढ़ नजूल टाउन स्थित प्लॉट नंबर 845/8 (रकबा 2871 वर्ग फुट) के क्रय-विक्रय के आधार पर नामांतरण की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
वर्ष 2018 का पहला आदेश: 20 अगस्त 2018 को न्यायालय नजूल अधिकारी धर्मजयगढ़ द्वारा पारित आदेश (प्रकरण क्रमांक 6/अ-6/2017-18) में यह स्पष्ट किया गया था कि धर्मजयगढ़ तहसील एक ‘आदिम जनजाति अधिसूचित क्षेत्र’ है। भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 165(6) के अनुसार, आदिवासी भूमि को गैर-आदिवासी द्वारा खरीदने से पहले कलेक्टर की पूर्व अनुमति अनिवार्य है।
पहले निरस्त हुआ था नामांतरण: चूंकि विक्रेता (अभिषेक कुजूर) अनुसूचित जनजाति समुदाय से हैं और खरीदार (कुमुद मंडल व कौशिक मंडल) गैर-आदिवासी श्रेणी में आते हैं, इसलिए नियमों का उल्लंघन होने के कारण 2018 में नामांतरण आवेदन को खारिज कर दिया गया था।
न्यायालय को गुमराह करने का आरोप
प्रस्तुत किए गए आवेदन के अनुसार, 29 नवंबर 2023 को पारित एक नए आदेश (प्रकरण क्रमांक 20240104220006/अ-6/2022-23) में इसी भूमि का नामांतरण गैर-आदिवासी खरीदारों के नाम पर कर दिया गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि:
वर्ष 2023 के आदेश में 2018 में पारित पुराने खारिज आदेश का कोई उल्लेख नहीं किया गया।
न्यायालय को गुमराह करते हुए और तथ्य छुपाते हुए विधि-विरुद्ध तरीके से अपने पक्ष में नामांतरण आदेश जारी करवा लिया गया।
नए आदेश में यह दर्शाया गया कि संबंधित भूमि पर छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 165(6) लागू नहीं होती।
जांच और कार्रवाई की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के समक्ष प्रासंगिक दस्तावेज प्रस्तुत कर त्वरित निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।
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