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September 8, 2026

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आधुनिक परिवेश एवं शिक्षण व्यवस्था में भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन की महती आवश्यकता : राज्यपाल श्री मंगूभाई पटेलभारतीय ज्ञान प्रणाली के विकास में निजी विश्वविद्यालयों की भूमिका पर हुआ व्यापक मंथन

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सतना। भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और उसे आधुनिक शिक्षण व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में निजी विश्वविद्यालयों की भूमिका को लेकर निजी विश्वविद्यालय संघ एवं मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय ज्ञान प्रणाली के विकास में निजी विश्वविद्यालयों की भूमिका” विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में एकेएस विश्वविद्यालय, सतना की सक्रिय एवं गरिमापूर्ण सहभागिता रही।


कार्यशाला में मध्यप्रदेश के माननीय राज्यपाल श्री मंगूभाई पटेल का गरिमापूर्ण स्वागत एकेएस विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर एवं निजी विश्वविद्यालय संघ के कार्यकारी अध्यक्ष श्री अनंत कुमार सोनी ने किया। कार्यशाला में एकेएस विश्वविद्यालय की ओर से प्रो-चांसलर एवं निजी विश्वविद्यालय संघ के कार्यकारी अध्यक्ष श्री अनंत कुमार सोनी, कुलगुरु प्रो. बी.ए. चौपड़े, डॉ. आर.एल.एस. सिकरवार एवं डॉ. महेंद्र कुमार तिवारी सहित विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री मंगूभाई पटेल ने कहा कि आधुनिक परिवेश एवं वर्तमान शिक्षण व्यवस्था में भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन की महती आवश्यकता है। उन्होंने भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने तथा नई पीढ़ी को देश की समृद्ध ज्ञान, संस्कृति, दर्शन और परंपराओं से परिचित कराने पर जोर दिया।
इस अवसर पर एकेएस विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में विशेष रूप से कार्य किए जाने की जानकारी भी सामने आई। विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान, संस्कृति, परंपराओं एवं जीवन-मूल्यों से परिचित कराने के लिए अकादमिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से निरंतर प्रयास किए जाते हैं। विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से परंपरागत एवं व्यावहारिक रूप से परिचित कराने के साथ-साथ इसके आधुनिक संदर्भ और उपयोगिता को समझाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।
कार्यशाला में भारतीय ज्ञान प्रणाली की समृद्ध परंपरा को उच्च शिक्षा के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने, उसके संरक्षण एवं संवर्धन तथा समकालीन शिक्षा व्यवस्था में उसके प्रभावी समावेश को लेकर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। शिक्षाविदों एवं विशेषज्ञों ने भारतीय ज्ञान, संस्कृति, दर्शन, परंपराओं तथा देश की समृद्ध बौद्धिक विरासत को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने में निजी विश्वविद्यालयों की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार तथा शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल भाई कोठारी ने भी भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता और उसके व्यापक विस्तार की आवश्यकता पर महत्वपूर्ण विचार रखे।
वक्ताओं ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की शिक्षा को दिशा देने वाली महत्वपूर्ण ज्ञान-संपदा है। निजी विश्वविद्यालय शोध, नवाचार, पाठ्यक्रम विकास और अकादमिक गतिविधियों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यशाला का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों के माध्यम से भारतीय ज्ञान प्रणाली को सशक्त बनाना तथा निजी विश्वविद्यालयों की सक्रिय सहभागिता के माध्यम से भारतीय ज्ञान, संस्कृति एवं परंपराओं को शिक्षा की मुख्यधारा से प्रभावी रूप से जोड़ना रहा। कार्यशाला में एकेएस विश्वविद्यालय की सहभागिता को भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति विश्वविद्यालय की अकादमिक प्रतिबद्धता, सक्रिय दृष्टिकोण और संस्थागत समर्पण के रूप में देखा गया।

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