खबर के बाद जागा प्रशासन, लिया त्वरित संज्ञान! वैकल्पिक मार्ग के यथाशीघ्र निर्माण का दिया आश्वासन
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धरमजयगढ़ – पुटूकछार में रपटा पुल डूबने के बाद प्रशासन के गांव पहुंचकर वैकल्पिक मार्ग तैयार करने के आश्वासन ने ग्रामीणों को राहत जरूर दी है, लेकिन इसके साथ ही पंचायत व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सवाल यह है कि जब रपटा पुल की समस्या वर्षों से बरसात में सामने आती रही और ग्रामीणों को हर साल परेशानी उठानी पड़ती रही, तो क्या गांव स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था पहले से नहीं की जा सकती थी? आखिर ऐसी स्थिति आने का इंतजार क्यों किया गया, जब स्कूली बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित होने लगी और ग्रामीणों का आवागमन ठप हो गया?

प्रशासन ने अब जिस कीचड़युक्त रास्ते को कंक्रीट सड़क बनाकर वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित करने का आश्वासन दिया है, वह सवाल को और गंभीर बनाता है। यदि यह विकल्प पहले से मौजूद था, तो पंचायत के जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों ने समय रहते इसे उपयोगी बनाने की पहल क्यों नहीं की ?

सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि क्या हर छोटी समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों को पहले परेशान होना होगा, फिर शिकायत करनी होगी और अंततः मीडिया में खबर आने का इंतजार करना होगा?
ग्राम पंचायतों का मूल उद्देश्य ही स्थानीय समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान करना है। यदि गांव के रास्ते, नाली, आवागमन जैसी बुनियादी समस्याओं के लिए भी मामला तब उठे जब वह बड़ा संकट बन जाए, तो पंचायत स्तर की जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बहरहाल, खबर सामने आने के बाद तहसीलदार और जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का ग्रामीणों की समस्या समझना और समाधान का आश्वासन देना फिलहाल एक सकारात्मक पहल है। लेकिन अब जरूरत केवल आश्वासन की नहीं, बल्कि समयबद्ध कार्रवाई की है।
क्योंकि पुटूकछार का सवाल सिर्फ एक रपटा या एक सड़क का नहीं है। सवाल यह है कि स्थानीय स्तर पर हल हो सकने वाली समस्याओं को आखिर कब तक अनदेखा किया जाएगा और क्या प्रशासनिक तंत्र तब ही सक्रिय होगा, जब कोई समस्या खबर बनकर सामने आएगी?
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