फर्जी आधार से पोरिया के ताराचंद्र को बनाया राजस्थान की करोड़ों की जमीन का मालिक ?
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हरियाणा का मुख्तियार, ओडिशा-छत्तीसगढ़ के गवाह और करोड़ों की जमीन का सौदा!
पहचान से लेकर जाति तक कई सवालों के घेरे में | ग्रामीणों का दावा—पोरिया में कभी रहा ही नहीं ऐसा ताराचंद्र | कौन है पूरे खेल का मास्टरमाइंड ?
धरमजयगढ़ – धरमजयगढ़ क्षेत्र निवासी से जुड़े एक भूमि प्रकरण में सामने आई जानकारियों ने जमीन की खरीद-बिक्री और पहचान संबंधी दस्तावेजों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, करोड़ों रुपये मूल्य की बताई जा रही एक जमीन के सौदे में ऐसे लोगों की भूमिका सामने आई है, जिनका संबंध अलग-अलग राज्यों से बताया जा रहा है। मामले में पहचान, आम मुख्तियारी, गवाह और जाति संबंधी विवरणों को लेकर कथित विसंगतियों ने पूरे प्रकरण को संदिग्ध बना दिया है।
फर्जी आधार से किसी और को बनाया गया भू-स्वामी?
मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी कथित रूप से ताराचंद्र की पहचान से जुड़ी है। जानकारी के अनुसार भूमि संबंधी अभिलेखों में ताराचंद्र को भिवानी, हरियाणा निवासी तथा ब्राह्मण/सामान्य वर्ग का बताया गया है। वहीं सूत्रों का दावा है कि भूमि सौदे में पहचान के तौर पर जिस आधार कार्ड का इस्तेमाल किया गया, वह धरमजयगढ़ के ग्राम पोरिया निवासी ताराचंद्र से संबंधित बताया जा रहा है।
मामले को और गंभीर बनाने वाला दावा यह है कि संबंधित आधार संख्या कथित तौर पर पोरिया के एक मंझवार परिवार के व्यक्ति की है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल कर किसी और को भूमि का स्वामी बनाकर प्रस्तुत किया गया?
यदि जांच में यह बात सही पाई जाती है तो मामला महज रिकॉर्ड की गलती नहीं, बल्कि पहचान के कथित दुरुपयोग और दस्तावेजी हेरफेर का गंभीर विषय बन सकता है।
ग्रामीणों का दावा—पोरिया में नहीं रहा ऐसा ताराचंद्र
इस पूरे मामले में ग्राम पोरिया से सामने आई जानकारी भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, गांव में ऐसा कोई ताराचंद्र लंबे समय तक निवासरत नहीं रहा, जिसे संबंधित भूमि अभिलेखों में दर्ज व्यक्ति से जोड़ा जा सके।
यदि ग्रामीणों की यह बात सरकारी अभिलेखों की जांच में भी सही साबित होती है, तो यह सवाल और गंभीर हो जाएगा कि पोरिया से संबंधित पहचान दस्तावेज कथित तौर पर भूमि सौदे में कैसे इस्तेमाल हुआ।
हरियाणा का प्रदीप बना आम मुख्तियार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के लोग गवाह
सूत्रों के अनुसार, भूमि सौदे से संबंधित प्रक्रिया में हरियाणा निवासी प्रदीप को आम मुख्तियार बताया गया है। वहीं ओडिशा निवासी आनंद गुप्ता तथा छत्तीसगढ़ निवासी रामकिशन के गवाह होने की जानकारी सामने आई है।
एक ओर कथित भू-स्वामी की पहचान धरमजयगढ़ क्षेत्र से जुड़ती है, दूसरी ओर आम मुख्तियार हरियाणा का और गवाहों में ओडिशा तथा छत्तीसगढ़ के लोग बताए जा रहे हैं। अलग-अलग राज्यों से जुड़े इन किरदारों की मौजूदगी ने मामले में अंतरराज्यीय कड़ी की आशंका को और गहरा कर दिया है।
सामान्य वर्ग का ताराचंद्र, फिर कथित परिजन अलग कैसे?
मामले में जाति संबंधी विवरण भी एक अलग सवाल खड़ा कर रहा है। जानकारी के अनुसार भूमि से जुड़े रिकॉर्ड में ताराचंद्र को ब्राह्मण/सामान्य वर्ग का बताया गया है, जबकि उसके कथित परिजनों को अगरिया समुदाय से संबंधित बताया जा रहा है।
यदि एक ही परिवार से जुड़े सरकारी अभिलेखों में जाति और पहचान को लेकर इस तरह का अंतर सामने आता है तो यह जानना जरूरी होगा कि संबंधित प्रविष्टियां किस आधार पर की गईं और इनमें से वास्तविक विवरण कौन-सा है।
करोड़ों की जमीन और कई राज्यों के किरदार—कौन है मास्टरमाइंड?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पहचान संबंधी कथित विसंगतियां जांच में सही साबित होती हैं, तो पूरी प्रक्रिया की योजना किसने बनाई? भूमि स्वामी की कथित पहचान कहां से आई? आम मुख्तियार की भूमिका किसने तय की? अलग-अलग राज्यों के गवाह इस प्रक्रिया में कैसे जुड़े? और इस सौदे का वास्तविक लाभार्थी कौन है?
सूत्रों के अनुसार, मामले से जुड़े कुछ अन्य तथ्यों और संभावित भूमि सौदों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। इससे यह आशंका भी सामने आ रही है कि मामला किसी एक सौदे तक सीमित न हो और अन्य जमीनों से जुड़े मामले भी सामने आ सकते हैं।
क्या राजस्थान पुलिस पहुंचेगी कथित फर्जीवाड़े की तह तक?
अब निगाहें संबंधित पुलिस, राजस्व और पंजीयन अधिकारियों पर हैं। यदि किसी दूसरे व्यक्ति के आधार अथवा पहचान दस्तावेज का कथित इस्तेमाल कर किसी व्यक्ति को भू-स्वामी के रूप में प्रस्तुत किया गया है, तो यह जांचना जरूरी होगा कि पंजीयन के समय पहचान का सत्यापन किस आधार पर हुआ।
क्या पंजीयन कार्यालय में मौजूद फोटो, बायोमेट्रिक, अंगूठे के निशान, पहचान पत्र और गवाहों के रिकॉर्ड की जांच होगी? क्या वास्तविक ताराचंद्र और कथित आधारधारक की पहचान का मिलान कराया जाएगा? और यदि जांच में पहचान दस्तावेज के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी?
मामले में वास्तव में क्या हुआ, कौन-कौन लोग इससे जुड़े रहे और क्या इसी तरीके से जमीनों की खरीद-बिक्री के और भी मामले मौजूद हैं, इन सवालों का जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आ सकता है। सूत्रों के अनुसार कुछ अन्य तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है, जिससे आने वाले दिनों में नए नाम और नए खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
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पहचान से लेकर मुख्तियारी और गवाहों तक उठ रहे सवालों ने पूरे मामले को रहस्यमय बना दिया है। यदि कथित दस्तावेजी हेरफेर की पुष्टि होती है तो पर्दे के पीछे मौजूद वास्तविक किरदारों तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
मामले में और क्या-क्या हुआ, कौन-कौन लोग इस कथित खेल से जुड़े रहे और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है—इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में जल्द ही सामने आने की उम्मीद है।

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