भूस्वामी छत्तीसगढ़ का, मुख्तियार हरियाणा का, गवाह ओडिशा और छत्तीसगढ़ के… और राजस्थान में हुईं जमीन की रजिस्ट्री ? क्या धरमजयगढ़ में फैल रहा अंतरराजयीय जमीन दलालों का मकड़जाल ?
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धरमजयगढ़ – धरमजयगढ़ क्षेत्र से जुड़े एक भूमि प्रकरण में सामने आई जानकारियों ने जमीनों की खरीदी-बिक्री की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, जिस भूमि का संबंध धरमजयगढ़ क्षेत्र के एक व्यक्ति से बताया जा रहा है, उसका पंजीयन राजस्थान के बीकानेर में हुआ है। इस मामले में सामने आई जानकारियों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर यह आशंका जताई जा रही है कि यह मामला केवल एक भूमि सौदे तक सीमित नहीं, बल्कि संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क से भी जुड़ा हो सकता है। हालांकि इन तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है।
सूत्रों का दावा है कि इस प्रकरण में भूमि स्वामी का संबंध छत्तीसगढ़ से बताया गया है, जबकि आम मुख्तियार हरियाणा का निवासी है। वहीं गवाहों में ओडिशा और छत्तीसगढ़ के व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि धरमजयगढ़ क्षेत्र से जुड़ी भूमि का पंजीयन राजस्थान में किन परिस्थितियों में किया गया और पूरी प्रक्रिया किस आधार पर संपन्न हुई।
जानकारी के अनुसार, मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि अभिलेखों में कई प्रकार की कथित विसंगतियों की आशंका भी जताई जा रही है। सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई है कि मुख्तियार देने वाले व्यक्ति के जाति संबंधी विवरण में भी कथित परिवर्तन किए जाने की आशंका है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल तकनीकी त्रुटि का नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक जांच का विषय बन सकता है।
भूमि मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि किसी भूमि का वास्तविक स्वामी लंबे समय से बाहर रह रहा हो, उत्तराधिकार संबंधी अभिलेख अद्यतन न हों, या भूमि शासकीय अथवा विवादित प्रकृति की हो, तो ऐसे मामलों में फर्जी पहचान, संदिग्ध पावर ऑफ अटॉर्नी, कूटरचित अभिलेख अथवा स्थानीय स्तर पर कथित मिलीभगत के माध्यम से अवैध खरीद-बिक्री की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में कई बार वास्तविक भू-स्वामी को तब तक जानकारी नहीं मिलती, जब तक राजस्व अभिलेखों की जांच या कोई विवाद सामने न आ जाए। हालांकि इस प्रकरण में भी इन सभी बिंदुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, राजस्थान के बीकानेर में पंजीकृत बताए जा रहे कुछ अन्य भूमि प्रकरणों की भी जानकारी सामने आई है, जिनका संबंध धरमजयगढ़ क्षेत्र से बताया जा रहा है। यदि इन मामलों की निष्पक्ष जांच होती है, तो कई और भूमि सौदों की परतें खुल सकती हैं और संभावित अंतरराज्यीय भूमि नेटवर्क का भी खुलासा हो सकता है।
अब कई महत्वपूर्ण प्रश्न जांच का विषय हैं। क्या अभिलेखों में दर्ज सभी पक्षकार वास्तविक हैं? क्या पहचान, जाति, पता अथवा अन्य विवरणों में किसी स्तर पर बदलाव किया गया? क्या पंजीयन की पूरी प्रक्रिया विधिसम्मत थी? क्या धरमजयगढ़ क्षेत्र से जुड़े लोगों की जमीनों का भी इसी प्रकार दूसरे राज्यों में पंजीयन कराया गया? इन सभी प्रश्नों के उत्तर सम्बंधित राजस्व विभाग, सम्बंधित पंजीयन विभाग और अन्य सम्बंधित सक्षम जांच एजेंसियों द्वारा विस्तृत जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
यदि सूत्रों से प्राप्त जानकारी और प्रारंभिक तथ्यों की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल एक भूमि सौदे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर भूमि अभिलेखों के दुरुपयोग, फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी और पंजीयन प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं की बड़ी जांच का आधार बन सकता है।
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