August 7, 2026

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कक्षाओं का बहिष्कार, व्यवस्थाओं पर लगा प्रश्न चिन्ह……… एकलव्य विद्यालय में आखिर कहां हुई चूक ?

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धरमजयगढ़ – आदिवासी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित आवासीय वातावरण और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय जो धरमजयगढ़ में संचालित है गुरुवार को छात्रों के विरोध प्रदर्शन के कारण चर्चा का विषय बन गया। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने विद्यालय एवं छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कक्षाओं का बहिष्कार किया। इस घटनाक्रम ने विद्यालय की व्यवस्थाओं और शिकायत निवारण प्रणाली को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर दिए हैं।


प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि छात्रावास में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। उनका कहना है कि भोजन में कई बार कीड़े और कांच के टुकड़े तक मिले हैं। इसके अलावा छात्रावास में साफ-सफाई, भोजन की गुणवत्ता तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी उन्होंने असंतोष व्यक्त किया। विद्यार्थियों का यह भी कहना था कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं हुआ।


छात्रों ने विद्यालय के प्राचार्य की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि प्राचार्य का अधिकांश समय विद्यालय से बाहर बीतता है, और वे कभी कभार ही विद्यालय आते हैं , जिससे व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी प्रभावित होती है। कुछ विद्यार्थियों ने यह भी दावा किया कि जब किसी अधिकारी या विशिष्ट अतिथि का दौरा होता है, तब व्यवस्थाओं में सुधार दिखाई देता है, लेकिन बाद में स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।


घटनाक्रम के दौरान कुछ छात्र अपनी शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचाना चाहते थे। हालांकि, उन्हें छात्रावास के कर्मचारियों द्वारा नियमों का हवाला देते हुए आगे जाने से रोक दिया गया। यदि ऐसा हुआ है तो यह भी विचारणीय विषय है कि विद्यार्थियों की शिकायतों को संस्थागत स्तर पर प्रभावी ढंग से सुनने और उनके समाधान की व्यवस्था कितनी कारगर है।


दूसरी ओर, विद्यालय के प्राचार्य एवं शिक्षक विद्यार्थियों के बीच पहुंचे और उन्हें समझाने का प्रयास किया। प्राचार्य ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि प्रशासनिक दायित्वों के कारण उन्हें समय-समय पर कार्यालयीन कार्यों से बाहर जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि विद्यालय की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है तथा विद्यार्थियों द्वारा उठाई गई समस्याओं का समाधान भी प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
यह पूरा घटनाक्रम कई स्वाभाविक प्रश्न खड़े करता है। यदि व्यवस्थाएं संतोषजनक हैं, तो फिर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एक साथ विरोध करने पर क्यों मजबूर हुए? यदि शिकायतें थीं, तो उनका समय पर समाधान क्यों नहीं हो सका? और यदि आरोपों में तथ्य नहीं हैं, तो विद्यार्थियों में इतना व्यापक असंतोष आखिर उत्पन्न कैसे हुआ?
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के संचालन पर सरकार प्रतिवर्ष पर्याप्त राशि व्यय करती है, ताकि दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं बेहतर आवासीय सुविधाएं मिल सकें। ऐसे में इस प्रकार का विरोध यह संकेत देता है कि संबंधित आरोपों और व्यवस्थाओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। जांच से ही स्पष्ट होगा कि विद्यार्थियों की शिकायतों में कितना तथ्य है, व्यवस्थाओं में वास्तव में किन स्तरों पर सुधार की आवश्यकता है और भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
फिलहाल, इस पूरे मामले में संबंधित विभाग और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई ही इस विवाद की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकेगी।

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