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July 5, 2026

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और पीसीआई के नए पाठ्यक्रम से बदलेगी फार्मेसी शिक्षा की तस्वीर, ए.के.एस. विश्वविद्यालय में रोजगारोन्मुखी बी.फार्मा का सुनहरा अवसर

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सतना। स्वास्थ्य सेवाओं और औषधि उद्योग के निरंतर विस्तार के साथ फार्मेसी आज देश के सबसे तेजी से उभरते करियर विकल्पों में शामिल हो चुकी है। दवा निर्माण, अनुसंधान, क्लीनिकल रिसर्च, अस्पताल, औषधि विपणन, गुणवत्ता नियंत्रण, नियामकीय कार्य, उद्यमिता तथा उच्च शिक्षा जैसे अनेक क्षेत्रों में प्रशिक्षित फार्मासिस्टों की बढ़ती मांग को देखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई), नई दिल्ली ने बी.फार्मा पाठ्यक्रम को आधुनिक, कौशल-आधारित और उद्योगोन्मुखी बनाया है। इसी नवीन पाठ्यक्रम के अनुरूप ए.के.एस. विश्वविद्यालय, सतना का राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध करा रहा है।


राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी के निदेशक डॉ. एस.पी. गुप्ता ने बताया कि नए पाठ्यक्रम में बहुविषयक शिक्षा, अकादमिक लचीलापन, अनुभवात्मक अधिगम, उद्योग आधारित प्रशिक्षण, अनुसंधान, नवाचार, डिजिटल दक्षता, उद्यमिता तथा व्यावसायिक कौशल के समन्वय पर विशेष बल दिया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि उद्योग एवं स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करने वाले दक्ष पेशेवर के रूप में तैयार करना है।
उन्होंने बताया कि संस्थान में आधुनिक प्रयोगशालाओं में नियमित प्रायोगिक प्रशिक्षण, औद्योगिक भ्रमण, इंटर्नशिप, विशेषज्ञ व्याख्यान, कार्यशालाएं तथा कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। साथ ही विभिन्न औषधि उद्योगों, अस्पतालों एवं शोध संस्थानों के सहयोग से विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे वे पढ़ाई के दौरान ही उद्योग की कार्यप्रणाली से परिचित हो जाते हैं।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय में अनुसंधान एवं नवाचार को विशेष प्रोत्साहन दिया जाता है। विद्यार्थियों को शोध-पत्र प्रकाशन, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में सहभागिता तथा पेटेंट से संबंधित गतिविधियों के लिए आवश्यक मार्गदर्शन एवं संस्थागत सहयोग प्रदान किया जाता है। इससे उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार क्षमता और समस्या समाधान की योग्यता विकसित होती है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में फार्मेसी स्नातकों के लिए सरकारी एवं निजी अस्पतालों, औषधि निर्माण कंपनियों, गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं, अनुसंधान संस्थानों, क्लीनिकल रिसर्च संगठनों, औषधि नियामक संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों तथा स्वयं के औषधि व्यवसाय स्थापित करने जैसे अनेक आकर्षक अवसर उपलब्ध हैं। यही कारण है कि फार्मेसी आज युवाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और उज्ज्वल भविष्य वाला करियर बनकर उभरी है।
डॉ. गुप्ता ने विद्यार्थियों और अभिभावकों से आह्वान किया कि वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं पीसीआई के नवीन पाठ्यक्रम के अनुरूप संचालित बी.फार्मा कार्यक्रम की विशेषताओं, उपलब्ध सुविधाओं तथा करियर संभावनाओं की जानकारी प्राप्त कर समय रहते प्रवेश सुनिश्चित करें और आधुनिक फार्मेसी शिक्षा के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा एवं औषधि उद्योग में सफल भविष्य की मजबूत नींव रखें।

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