एकेएस विश्वविद्यालय में विकसित सेंसर आधारित स्मार्ट मटका प्रणाली, परंपरागत जलपात्र को मिली आधुनिक तकनीक की नई पहचान
1 min read
सतना। नैक प्रत्यायित एवं सेंट्रल इंडिया की बेस्ट प्लेसमेंट यूनिवर्सिटी एकेएस विश्वविद्यालय में नवाचार और व्यावहारिक तकनीक को बढ़ावा देते हुए युवा तकनीकी विशेषज्ञ राहुल कोटवानी (पिता– राजकुमार कोटवानी) ने इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) एवं सेंसर तकनीक पर आधारित स्मार्ट फिल्ट्रेशन मटका प्रणाली विकसित की है। यह टच-फ्री प्रणाली स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के साथ जल संरक्षण और स्वच्छता को भी बढ़ावा देती है।

इस प्रणाली में मटके का पानी एक लघु पंप द्वारा फिल्टर से होकर शुद्ध होता है। इसके बाद इन्फ्रारेड (IR) सेंसर पूरी प्रक्रिया को स्वचालित रूप से नियंत्रित करता है। जैसे ही कोई व्यक्ति सेंसर के सामने गिलास लाता है, पंप स्वतः चालू होकर पानी भरता है और गिलास हटाते ही पानी का प्रवाह स्वतः बंद हो जाता है। इससे बिना स्पर्श के स्वच्छ पानी उपलब्ध होता है, संक्रमण की संभावना कम होती है तथा पानी की अनावश्यक बर्बादी भी रुकती है।
राहुल कोटवानी लंबे समय से IoT, एम्बेडेड सिस्टम और होम ऑटोमेशन आधारित तकनीकों पर कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में वे एकेएस विश्वविद्यालय, पॉलिटेक्निक कॉलेज सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को प्रायोगिक प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थी सेंसर आधारित परियोजनाओं, सोलर पैनलों की स्वचालित सफाई, प्लांट ऑटो इरिगेशन सिस्टम, स्मार्ट होम ऑटोमेशन तथा अन्य तकनीकी नवाचारों पर कार्य कर रहे हैं। इससे पूर्व वर्ष 2020 एवं 2023 में भी उन्होंने स्वचालित सैनिटाइजर मशीन तथा मोशन सेंसर आधारित उपकरण विकसित किए थे।
एकेएस विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर इंजीनियर अनन्त कुमार सोनी तथा कंप्यूटर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय के डीन डॉ. अखिलेश ए. वाऊ ने राहुल कोटवानी को बधाई देते हुए कहा कि यह पहल विद्यार्थियों में अनुसंधान, नवाचार और व्यावहारिक तकनीकी दक्षता को प्रोत्साहित कर उन्हें भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
Subscribe to my channel